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Dhan Yog in Kundli: क्या आपकी कुंडली में भी है धन योग? जानें कैसे होता है इसका निर्माण

Sat, 19 Apr 2025 05:01 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Signs Of Dhan Yog : वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली के दूसरे भाव (धन का भाव), ग्यारहवें भाव (लाभ का भाव) और नवम भाव (भाग्य का भाव) का विशेष महत्व है, क्योंकि इन तीनों भावों से धन के योग का निर्माण होता है।
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कुंडली में धन योग के लक्षण - फोटो : adobe stock
Dhan Yog Astrology Meaning: कुंडली में धन का योग विभिन्न ग्रहों, भावों और उनकी स्थिति के आधार पर बनता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली के दूसरे भाव (धन का भाव), ग्यारहवें भाव (लाभ का भाव) और नवम भाव (भाग्य का भाव) का विशेष महत्व है, क्योंकि इन तीनों भावों से धन के योग का निर्माण होता है। जब इन भावों के स्वामी ग्रह शुभ स्थिति में होते हैं और आपस में युति, दृष्टि या स्थिति के माध्यम से शुभ योग बनाते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में धन और समृद्धि का वास होता है। इस प्रकार के धन योग व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में धन की कमी का सामना नहीं करने देते।
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धन योग के बनने का कारण कई ग्रहों के बीच का तालमेल और उनके मध्य शुभ संबंध हो सकते हैं। कुछ ग्रहों की विशेष युति और दृष्टि से बनने वाले योगों को धन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में कुल 32 प्रकार के योग माने जाते हैं, जिनमें से कुछ को धन के योग के रूप में पहचाना जाता है। इन योगों में राजयोग भी होते हैं, जो विशेष रूप से व्यक्ति को अपार धन और समृद्धि प्रदान करते हैं। आइए जानते हैं कि कुंडली में कैसे बनता है धन योग। 
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कुंडली में धन योग के लक्षण - फोटो : अमर उजाला
लग्नेश और धनेश का संबंध
जब कुंडली में लग्न का स्वामी (लग्नेश) और दूसरे भाव का स्वामी (धनेश) एक साथ किसी शुभ भाव में स्थित होते हैं या एक-दूसरे को देख रहे होते हैं, तो यह धन योग का संकेत है। इसका मतलब है कि व्यक्ति का भाग्य और समृद्धि दोनों ही साथ रहते हैं और वह किसी भी स्थिति में धन की कमी नहीं महसूस करता।

धनेश और लाभेश का संबंध
यदि दूसरे भाव (धन का भाव) के स्वामी और ग्यारहवें भाव (लाभ का भाव) के स्वामी एक-दूसरे से दृष्टि करते हैं या साथ में शुभ भावों में स्थित होते हैं, तो यह धन योग का निर्माण करता है। इसका मतलब यह है कि व्यक्ति को कई स्रोतों से धन प्राप्त होता है और उसका जीवन भरपूर होता है।
 
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कुंडली - फोटो : अमर उजाला
त्रिकोण भावों के स्वामियों का संबंध
लग्न, पंचम (बुद्धि और पूर्व पुण्य का भाव) और नवम (भाग्य भाव) के स्वामियों के बीच अच्छा संबंध (युति या दृष्टि) धन योग का निर्माण करता है। यह योग भाग्य और धन दोनों को मजबूत करता है और व्यक्ति को सफलता, समृद्धि और खुशहाली प्रदान करता है।

केंद्र और त्रिकोण भावों के स्वामियों का संबंध
केंद्र भाव (पहला, चौथा, सातवां और दसवां भाव) और त्रिकोण भाव (लग्न, पंचम, नवम) के स्वामियों का आपस में संबंध होना भी धन योग का निर्माण करता है। यह व्यक्ति को स्थिर और सशक्त आर्थिक स्थिति में डालता है, साथ ही उसे सामाजिक और व्यावसायिक सफलता भी मिलती है।

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कुंडली में धन योग के लक्षण - फोटो : Adobe Stock
गुरु और शुक्र की शुभ स्थिति
गुरु और शुक्र का कुंडली में शुभ स्थिति में होना धन योग का निर्माण करता है। गुरु का संबंध ज्ञान, शिक्षा और विस्तार से है, जबकि शुक्र का संबंध भौतिक सुखों और विलासिता से है। जब ये दोनों ग्रह कुंडली में अच्छे स्थान पर होते हैं, तो यह व्यक्ति को धन, सुख और समृद्धि प्रदान करता है।
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कुंडली में धन योग के लक्षण - फोटो : freepik.com
महालक्ष्मी योग
अगर कुंडली के लग्न या चंद्रमा से नवम भाव का स्वामी अपनी उच्च राशि या मित्र राशि में स्थित हो, तो यह महालक्ष्मी योग बनता है। यह योग व्यक्ति को अपार धन और समृद्धि का आशीर्वाद देता है, और उसकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है।

गजकेसरी योग
गजकेसरी योग तब बनता है जब चंद्रमा और गुरु केंद्र भावों (पहला, चौथा, सातवां और दसवां) में एक साथ स्थित होते हैं या एक-दूसरे से दृष्टि करते हैं। यह योग धन, यश, प्रतिष्ठा और सामाजिक सम्मान प्रदान करता है। इसके द्वारा व्यक्ति को स्थायी धन प्राप्ति का मार्ग मिलता है।
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कुंडली में धन योग के लक्षण - फोटो : Adobe Stock
ये भी जानें 
  • जिनकी कुंडली में धन योग होता है, वे व्यक्ति अपने जीवन में धन की कोई कमी नहीं महसूस करते।
  • उनके पास कई स्रोतों से आय होती है, और वे अक्सर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सफल रहते हैं।
  • इस तरह के व्यक्तियों को अक्सर भाग्य का साथ मिलता है और वे भौतिक सुख-सुविधाओं का भी आनंद लेते हैं।
  • उनकी जीवनशैली में संतुलन होता है, और वे किसी भी प्रकार की आर्थिक समस्याओं से बचने में सक्षम होते हैं।
  • इन व्यक्तियों के पास अधिक धन जमा करने की क्षमता होती है और वे अपने निवेश के फैसलों में भी चतुर होते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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