कुंडली
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त्रिकोण भावों के स्वामियों का संबंध
लग्न, पंचम (बुद्धि और पूर्व पुण्य का भाव) और नवम (भाग्य भाव) के स्वामियों के बीच अच्छा संबंध (युति या दृष्टि) धन योग का निर्माण करता है। यह योग भाग्य और धन दोनों को मजबूत करता है और व्यक्ति को सफलता, समृद्धि और खुशहाली प्रदान करता है।
केंद्र और त्रिकोण भावों के स्वामियों का संबंध
केंद्र भाव (पहला, चौथा, सातवां और दसवां भाव) और त्रिकोण भाव (लग्न, पंचम, नवम) के स्वामियों का आपस में संबंध होना भी धन योग का निर्माण करता है। यह व्यक्ति को स्थिर और सशक्त आर्थिक स्थिति में डालता है, साथ ही उसे सामाजिक और व्यावसायिक सफलता भी मिलती है।