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Chaitra Navratri in Kharmas: खरमास के बीच में पड़ेगी चैत्र नवरात्रि, इन राशि के जातकों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Sun, 30 Mar 2025 06:45 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Negative Impact On Zodiac Sign: चैत्र नवरात्रि इतनी शुभ होती है, वही खरमास में शुभ काम करने की मनाही होती है। ऐसे में क्या नवरात्रि की शक्ति इस नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकती है? ज्योतिष के अनुसार, यह निर्भर करता है कि आपकी राशि पर इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है। कुछ राशियों को इस दौरान बहुत संभलकर रहना होगा।
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खरमास में चैत्र नवरात्रि - फोटो : adobe stock
Chaitra Navratri in Kharmas 2025: आज यानी 30 मार्च 2025, रविवार से चैत्र नवरात्रि शुरू हो गई है और ये  6 अप्रैल 2025 को समाप्त होगी ।चैत्र नवरात्रि हिंदू पंचांग के अनुसार बहुत ही शुभ समय होता है, क्योंकि इसी दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होती है। नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, भक्त व्रत रखते हैं, घरों में कलश स्थापना होती है और जगह-जगह धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। यह समय आध्यात्मिक उन्नति और आत्मशुद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

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लेकिन इस बार नवरात्रि के साथ खरमास भी लगा हुआ है, जो 14 अप्रैल तक चलेगा। खरमास वह अवधि होती है जब सूर्य मीन राशि में गोचर करता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है। शादी, गृह प्रवेश, मुंडन, व्यवसाय की शुरुआत जैसे कार्य वर्जित माने जाते हैं। हालांकि, पूजा-पाठ, जप-तप और साधना के लिए यह समय उत्तम होता है।

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जहां एक तरफ चैत्र नवरात्रि इतनी शुभ होती है, वही खरमास में शुभ काम करने की मनाही होती है। ऐसे में क्या नवरात्रि की शक्ति इस नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकती है? ज्योतिष के अनुसार, यह निर्भर करता है कि आपकी राशि पर इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है। कुछ राशियों को इस दौरान बहुत संभलकर रहना होगा। आइए जानते हैं इस दौरान किन राशियों को संभल कर रहना चाहिए। 
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खरमास में चैत्र नवरात्रि - फोटो : Adobe Stock
खरमास का प्रभाव और इसका महत्व
खरमास के दौरान सूर्य की ऊर्जा कमजोर हो जाती है और यह विवाह, व्यापार और अन्य शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं रहता। खरमास के दौरान सूर्य मीन राशि में होता है और जब तक वह मेष राशि में नहीं पहुंचता, तब तक इस समय को शुभ कार्यों के लिए त्याग दिया जाता है। यह परिवर्तन हर साल होता है, लेकिन इस बार यह नवरात्रि के साथ पड़ रहा है, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार खरमास में कोई भी नया कार्य सफलता नहीं दिलाता। इस दौरान जो लोग बिना मुहूर्त देखे नए काम शुरू कर देते हैं, उन्हें बाद में संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन इसका एक सकारात्मक पक्ष भी है। यह समय आध्यात्मिक प्रगति के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। जो लोग इस दौरान तप, ध्यान, मंत्र जाप और साधना करते हैं, उन्हें विशेष फल की प्राप्ति होती है। देवी दुर्गा की पूजा इस समय को शुभ बना सकती है और नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकती है। हालांकि, कुछ राशियों को इस दौरान विशेष रूप से सतर्क रहना होगा, क्योंकि उन पर इसका प्रभाव ज्यादा गहरा पड़ सकता है। आइए जानते हैं कौन सी हैं वो राशियां। 

 

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खरमास में चैत्र नवरात्रि - फोटो : amar ujala
वृषभ राशि
वृषभ राशि के लिए यह समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आर्थिक रूप से कुछ परेशानियां आ सकती हैं और खर्चे अचानक बढ़ सकते हैं। अगर आपने पहले से कोई निवेश कर रखा है, तो उसमें घाटा हो सकता है। इस दौरान वाणी पर संयम रखना बहुत जरूरी होगा, क्योंकि आपके गलत शब्दों  रिश्तों में दरार तक ला सकते हैं। दांपत्य जीवन में भी कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

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खरमास में चैत्र नवरात्रि - फोटो : amar ujala
कन्या राशि
कन्या राशि के लोगों को इस दौरान अपने गुस्से पर काबू रखना होगा। अचानक से किसी के साथ विवाद हो सकता है, जिससे रिश्तों में मनभेद हो सकता है। इस समय स्वास्थ्य को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है, खासकर बच्चों की सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। आर्थिक रूप से यह समय उतार-चढ़ाव वाला रहेगा।  किसी भी कानूनी विवाद में फंसने से बचना चाहिए। अगर कोर्ट में पहले से कोई केस चल रहा है, तो फैसला आपके पक्ष में आने की संभावना कम है।
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खरमास में चैत्र नवरात्रि - फोटो : amar ujala
कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में कुछ बाधाएं लेकर आ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को अपने कार्यस्थल पर संघर्ष करना पड़ सकता है और प्रमोशन में देरी हो सकती है। व्यापारियों को इस दौरान निवेश करने से बचना चाहिए, वरना नुकसान तक उठाना पड़ सकता है। इसके साथ ही कुंभ राशि के जातकों का मानसिक तनाव बढ़ सकता है और निजी जीवन में भी कुछ मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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