वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, तर्क, संवाद, गणित और व्यापार का कारक ग्रह माना जाता है। बुध को ग्रहों का राजकुमार का दर्जा प्राप्त है। ज्योतिष में बुध की गिनती शुभ ग्रहों में होती है। बुध को मिथुन और कन्या राशि का स्वामी माना जाता है। बुध एक राशि में करीब 23 दिनों तक रहते हैं, फिर इसके बाद दूसरी राशि में गोचर करते हैं। इसके अलावा बुध समय-समय पर वक्री और मार्गी होते रहते हैं। 10 नवंबर, रविवार को बुध ग्रह मंगलदेव के स्वामित्व वाली राशि वृश्चिक राशि में वक्री हो रहेंगे। बुध 30 नवंबर तक वक्री रहेंगे। बुध की उल्टी चाल चलने से कुछ राशियों पर ज्यादा प्रभाव देखने को मिलेगा।