राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को दोपहर 02:35 पर दिल्ली में हुआ है। जिसके अनुसार राहुल गांधी का जन्म तुला लग्न में हुआ है और लग्न में बृहस्पति तथा भाग्य स्थान में सूर्य-मंगल विराजमान है, जो अकारक (खराब) होते हुए भी अनुकूल स्थिति में होने के कारण सामान्य रूप से शुभ फलदायी हैं। लग्नाधिपति शुक्र दशम घर में कर्क राशि में मजबूत पाया जा रहा है, जो शारीरिक रूप से मजबूती प्रदान करता है।
इसके अलावा भाग्याधिपति बुध अष्टम भाव में होकर इस कुंडली के उत्तरार्ध के जीवन में कमजोर स्थिति को प्राप्त कर रहा है। जो थोड़ा कठिनाइयों का सूचक भी है। साथ ही साथ पंचम शनि जो जन्मपत्री का महत्वपूर्ण कारक ग्रह है और बौद्धिक क्षमता का मालिक भी वह सप्तम भाव में एक अस्थिर राशि में पाया जा रहा है। जो राहुल गांधी के बाल सुलभ, अस्थिर और अत्यधिक भावना प्रधान होने का सूचक है, क्योंकि शनि गुरु से दृष्ट है और गुरु भी चर राशि में पाया जा रहा है।
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किस ग्रह के कारण करना पड़ रहा है संघर्ष?
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क्या कहती है राहुल गांधी की कुंडली?
- फोटो : PTI
ऐसी स्थिति में बाल सुलभता और भावुकता राहुल गांधी के अंदर काफी ज्यादा है, लेकिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यहां पर यह है कि इस जन्मपत्री में अगर अकारक ग्रह अनुकूल स्थिति में या फिर कहें एक सामान्य फलदायी स्थिति में है, तो राजनीतिक जीवन में राहुल गांधी के संघर्ष का क्या कारण है? इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि इस जन्मपत्री के नवांश चक्र में अकारक (खराब) ग्रहों की अत्यधिक मजबूत स्थिति होना।
इस नवांश चक्र मे अकारक (खराब) ग्रह शनि-बुध और शुक्र उत्तरार्ध की जीवन में काफी मजबूत होते जा रहे हैं। नवांश चक्र वृश्चिक लग्न का है, जिसमें सूर्य खुद लग्न में एक जलीय राशि होने के कारण अत्यधिक कमजोर है और वहां पर शनि काफी प्रबल स्थिति में दिखाई दे रहा है। साथ ही साथ एकादश भाव में शुक्र और सप्तम भाव में बुध काफी मजबूत स्थिति में कहा जाएगा। जो संघर्ष का सूचक है और इस जन्मपत्री में कठिनाई का सूचक है। यहां पर पंचमेश गुरु द्वादश भाव में चर राशि में पाया जा रहा है।
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इस कारण नहीं छिपा पाते कोई बात
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क्या कहती है राहुल गांधी की कुंडली?
यह गुरु एक कल्पनाशील और भावना प्रधान स्वभाव का परिचायक है तथा हमेशा काल्पनिक विचारों पर अपनी योजनाएं आधारित करने वाले व्यक्ति का परिचायक है। ऐसे व्यक्तियों के अंदर धैर्य की कमी होती है और रिश्तो में भावनात्मक महत्ता की आकांक्षा ज्यादा होती है। हालांकि ऐसे लोग अत्यधिक दिल के साफ होते हैं और कोई बात छुपा नहीं पाते हैं। इनके अंदर बहुत ज्यादा डिप्लोमेसी की कमी होती है। इस कारण राजनीति में सफल होने में कठिनाई होती है। फिर भी 12वें घर का गुरु बहुत हद तक चीजें विरासत में दे देता है। जिसके आधार पर आदमी अपना जीवन उसी विरासत को संभालने मे लगा देता है। लेकिन खुद के दम पर व्यावहारिक रूप से कुछ हद तक कमजोर होता है।
क्यों मिली हार और अब आगे क्या होगा?
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क्या कहती है राहुल गांधी की कुंडली?
अभी वर्तमान में यही उपरोक्त ग्रहों की स्थितियां इनके असफलता और हार का कारण रहा क्योंकि ऐसे व्यक्ति बहुत ज्यादा अपने अधीनस्थ लोगों पर प्रभावी नहीं हो पाते हैं, अतः पार्टी में बहुत सारी चीजें इनकी कंट्रोल में नहीं आ पाती है। ऐसे में इनके अंदर संगठन को मजबूत करने की क्षमता में कमी कही जाएगी।
वर्तमान समय में राहुल गांधी 49 वर्ष की अवस्था पूर्ण कर ले गए हैं और 50 वर्ष में प्रवेश कर गए हैं 50 वे वर्ष की जो वर्ष कुंडली है। वृषभ लग्न की बन रही है और वृषभ लग्न में लग्न में शुक्र चंद्रमा के नक्षत्र का है। चंद्रमा भाग्य स्थान में सूर्य के नक्षत्र का है। सूर्य चक्र के दूसरे घर में मंगल के नक्षत्र का है और मंगल और बुध वहीं बैठे हैं। दोनों ही बृहस्पति के नक्षत्र में पाए जा रहे हैं और बृहस्पति से षडाष्टक योग बना रहे हैं।
इस स्थिति में महत्वपूर्ण बात यह है कि जो कारक ग्रह शुक्र और बुध दोनों ही बहुत ही निर्बल अवस्था में है यानी लग्नाधिपति और पंचमेश दोनों बहुत ही निर्बल अवस्था में है और अकारक (खराब) ग्रह मंगल-सूर्य एवं बृहस्पति काफी मजबूत है, जो राहुल गांधी के आत्मबल में कमी ला सकते हैं और राहुल गांधी को सही ढंग से निर्णय लेने में भी कठिनाइयां हो सकती है।
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क्या कहती है राहुल गांधी की कुंडली?
अगर इस वर्ष कुंडली के नवमांश चक्र पर बात करें तो इस वर्ष कुंडली का मेष लग्न का नवांश चक्र बन रहा है और एकादश भाव में चंद्रमा बृहस्पति एक अच्छा योग बना रहा है। साथ ही साथ तृतीय भाव में मंगल, शुक्र व बुध ही सामान्य रूप से राजनीति में सामान्य स्थिति का सूचक तो है, लेकिन अष्टम भाव में पंचमेश सूर्य का शनि व केतु के साथ पाया जाना, अत्यधिक आत्मबल में गिरावट का सूचक है और सही मायने में संगठन के पूर्ण रूप से नियंत्रण कर पाने में असमर्थता सूचक है।
बावजूद इसके चतुर्थ भाव का स्वामी चंद्रमा गुरु के साथ मजबूत स्थिति में है और साथ ही साथ चंद्रमा का नक्षत्राधिपति मंगल भी मजबूत स्थिति में है। ऐसी स्थिति में राहुल गांधी को माता और बहन का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। और परोक्ष रूप से माता और बहन पार्टी को संगठित करने में सक्षम होंगे लेकिन व्यक्तिगत रूप से राहुल गांधी का आत्मबल कमजोर होता देखने को मिलेगा। हां यह बात जरूर है कि पार्टी के अंदर बहन का और माता का बहुत ज्यादा सक्रियता देखने को मिलेगी। जिसका लाभ भी राहुल गांधी को मिलेगा।
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क्या कहती है राहुल गांधी की कुंडली?
- फोटो : पीटीआई
पचासवें वर्ष में राहुल गांधी को 20 जून 2019 से 11 जुलाई 2019, 4 सितंबर 2019 से 22 अक्टूबर 2019, 9 फरवरी 2020 से 1 मार्च 2020 एवं 1 मई 2020 से 19 जून 2020 आदि समय खराब होगा। इन उपरोक्त समय मे पार्टी के अंदर थोड़ा कठिनाइयां, खुद में आत्मबल में कमी और यदा-कदा तनाव की स्थिति महसूस होगी। इसमें सर्वाधिक खराब समय 20 जून 2019 से 11 जुलाई 2019 का समय कहा जाएगा। शेष इस 50 वें वर्ष में जो बीच-बीच मे नहीं लिखा गया है, वह सामान्य रूप से ठीक समय होगा।
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क्या कहती है राहुल गांधी की कुंडली?
अब रही बात राहुल गांधी की कुंडली के हिसाब से अगर भविष्य की बात करें तो राहुल गांधी भविष्य मे प्रधानमंत्री तो नहीं बनते दिखाई दे रहे हैं। चूंकि यह राजनीति विरासत में मिली है और राजनीति के सिवाय उनके पास कोई और विकल्प भी नहीं है। ऐसी स्थिति में उनका स्वभाव राजनीतिक नहीं होते हुए भी, उनके लिए राजनीति करना एक पारिवारिक दायित्व भी है और अहम जिम्मेदारी भी है। संभवत: वह उसी को निभाने की लगे हुए। जहां तक रही बात भविष्य की 53 वर्ष की अवस्था तक राहुल गांधी राजनीति में संघर्ष करते हुए अपने वजूद की लड़ाई लड़ते रहेंगे।
साथ ही साथ पार्टी मुख्य रूप से कमान संभाले रहेंगे, लेकिन ऐसा लगता है कि 53 वर्ष की अवस्था के बाद से राहुल गांधी सक्रिय राजनीति से पूर्ण रूप से एक नया रूप लेकर आगे बढ़ेंगे और विशिष्ट रूप से 55 वर्ष की अवस्था में एक नई सफलता की ओर राहुल गांधी बढ़ते दिखाई देंगे। यह बात अलग है 53 वर्ष की अवस्था तक हो सकता है कि मुख्य रूप से पार्टी कमान प्रियंका संभालने लगे और पार्टी मजबूती दिलाने मे सहायक हो।
55वें वर्ष मे प्रवेश के बाद राजनीति में राहुल गांधी काफी मजबूत नजर आएंगे। हालांकि भविष्य में उनके प्रधानमंत्री बनने के योग नहीं दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि उनका स्वभाव से वह कूटनीति और डिप्लोमेटिक नहीं है। नतीजतन, उन्हें राजनीति की इस डगर में तमाम तरह की कठिनाइयां होंगी। लेकिन राजनीतिक स्थिति और उनकी पार्टी, उनके उम्र के 53वें वर्ष की अवस्था के बाद से काफी मजबूत होगी। विशेषकर 55 वर्ष की अवस्था में उसका भरपूर लाभ भी ले पाएंगे। कहने का तात्पर्य यह कि अगला लोकसभा चुनाव निश्चित तौर पर राहुल गांधी और कांग्रेस दोनों के लिए काफी लाभकारी होगा और काफी प्रगति दिलाने में सहायक होगा।