चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के बीच राजनीति का पारा तेजी से चढ़ रहा है।एक ओर जहां अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में हो रहे खुलासों से विपक्षी दल कांग्रेस की नीद हराम हैं, वहीं दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई और सूखे की मार केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा रही है।इन सब के बीच 19 मई को चार राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों पर सबकी नजरे टिकी हुई हैं।ज्योतिषीय दृष्टिकोण से पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पार्टी के फिर से जीत हासिल करने के अच्छे संकेत मिल रहे हैं।
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किसकी बनेगी बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु में सरकार
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ममता बनर्जी
यह संभावना इसलिए दिख रही है क्योंकि मीन लग्न की तृणमूल कांग्रेस पार्टी की कुंडली में राहु-बुध-केतु की विंशोत्तरी दशा वर्तमान में चल रही है। छठे भाव में बैठ कर राहु इस पार्टी के नेताओं को विवादों के साथ-साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा करने की शक्ति दे रहे हैं। अन्तर्दशा नाथ बुध भाग्य भाव में हो कर सत्ता में इस पार्टी की नेता ममता बनर्जी की वापसी का संकेत दे रहे हैं।लेकिन प्रत्यन्तर दशा नाथ केतु हानि के भाव में हैं इसलिए अबकी बार तृणमूल कांग्रेस की जीत का अंतर बेहद कम रहेगा और सरकार बनने में कुछ कठिनाई भी आ सकती है l
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राहुल गांधी
- फोटो : ANI
कांग्रेस की कुंडली भी मीन लग्न की है लेकिन यहाँ चुनावों के समय चल रही गुरु में केतु की दशा इस पार्टी के नेताओं के 'भ्रम की कोठरी' में फंसे होने का संकेत दे रही है।कांग्रेस की कुंडली में मन का कारक ग्रह चन्द्रमा बेहद विकट सिथति में राहु-केतु अक्ष में फंसा हुआ है।पार्टी ने पश्चिम बंगाल में अपने पुराने विरोधी वाम मोर्चा से हाथ मिला रखा है लेकिन केरल में वह वाम दलों के विरुद्ध चुनाव लड़ रही है।केतु की इस भ्रमित करने वाली अन्तर्दशा में पार्टी अपनी खराब चुनावी नीति के चलते केरल और असम में सत्ता से हाथ धो सकती है।
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बंगाल चुनाव
अब 31 अक्टूबर 1964 को दोपहर 2 बज कर 18 मिनट पर कोलकाता में बनी सीपीआई की कुंडली पर नजर डालें जो की कुम्भ लग्न की है।इस कुंडली में चल रही गुरु में सूर्य की मजबूत दशा चुनावों में वाम मोर्चे के प्रदर्शन में सुधार का अच्छा संकेत है। वाम मोर्चा केरल में सत्ता में आ सकता है।