Predictions: वर्ष 2026 में शनि देव 27 जुलाई से मीन राशि में वक्री (उल्टी चाल) होकर 11 दिसंबर 2026 तक लगभग 138 दिनों तक इसी स्थिति में रहेंगे, जिसका भारत पर प्रभाव राजनीतिक उथल-पुथल, आर्थिक क्षेत्रों में सुस्ती और कूटनीतिक चुनौतियों के रूप में सामने आता है।
देश की आंतरिक व्यवस्था, नेतृत्व की परीक्षा का समय रहेगा। इस वर्ष की शुरुआत एक ही पक्ष में दो ग्रहण से हुई और फिर रौद्र नामक संवत्सर की शुरुआत हुई, साथ ही देवगुरु बृहस्पति की अतिचारी गति, वैदिक ज्योतिष और हिंदू पौराणिक कथाओं में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धर्म और विवेक का मुख्य कारक माना गया है।
यह मनुष्य के जीवन में धर्म, आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों का मार्गदर्शन करते हैं। इसलिए जब देवगुरु बृहस्पति अपनी सामान्य गति में परिवर्तन करके अतिचारी गति पर आते हैं तो ज्ञान, धर्म और शासन सत्ता से जुड़े लोगों का नैतिक मूल्यों के प्रति कर्तव्य डगमगाने लगता है।