वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर का विशेष स्थान होता है। ग्रह एक निश्चित अंतराल पर राशि परिवर्तन करते हैं, जिसका प्रभाव सभी राशियों के जातकों पर किसी न किसी रूप में जरूर होता है। जब किसी जातक का जन्म होता है तो उस समय ग्रहों की जैसी स्थिति होती है उसकी के आधार पर कुंडली का निर्माण होता है। सभी 9 ग्रह कुंडली के 12 भावों में कहीं न कहीं विराजमान अवश्य होते हैं। वहीं दूसरी तरफ ग्रह एक निश्चित अंतराल पर एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं तो जातकों के जीवन पर असर डालते हैं। ग्रह राशि परिवर्तन करते हुए अपने मित्र और शुत्र की राशि में गोचर करते हुए युति करते हैं। आपको बता दें कि कुछ समय बाद शनि और राहु दो महत्वपूर्ण ग्रहों का राशि परिवर्तन होगा, जिससे युति का निर्माण होगा। आपको बता दें कि राहु अभी मीन राशि में हैं और शनि कुछ दिनों बाद कुंभ राशि की अपनी यात्रा को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश कर जाएंगे। शनि-राहु की मीन राशि में युति होने से कुछ राशि के जातकों का भाग्य चमक सकता है।