फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कुंडली के ये 6 दोष रोक सकते हैं तरक्की की राह, जानें सरल ज्योतिषीय उपाय

Fri, 12 Jun 2026 07:36 AM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

जन्म कुंडली में ग्रह दोष होने पर व्यक्ति को करियर, धन, स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रह दोषों के प्रभाव को कम करने और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाने के लिए कई सरल एवं प्रभावी उपाय बताए गए हैं। जानिए ग्रह दोष दूर करने के ज्योतिषीय उपाय।

विज्ञापन
1 of 7
Grah dosh - फोटो : amar ujala
Kundali Ke Grah Dosh: वैदिक ज्योतिष में ग्रहों और उनकी स्थितियों का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव माना जाता है। जन्म कुंडली में कुछ विशेष ग्रह योग जहां सफलता, सुख और समृद्धि का संकेत देते हैं, वहीं कुछ ग्रह दोष जीवन में बाधाएं और चुनौतियां भी उत्पन्न कर सकते हैं। मान्यता है कि इन दोषों के कारण व्यक्ति को करियर, विवाह, संतान, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में बार-बार परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि ज्योतिष शास्त्र में ऐसे दोषों के प्रभाव को कम करने के लिए कई उपाय भी बताए गए हैं। कालसर्प दोष, मंगल दोष, पितृ दोष, गुरु चांडाल दोष, विष दोष और केन्द्राधिपति दोष ऐसे प्रमुख दोष माने जाते हैं, जिनकी चर्चा अक्सर की जाती है। आइए जानते हैं इन महत्वपूर्ण दोषों के बारे में और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्योतिषीय उपायों के बारे में।
Mars Transit 2026: मंगल करेंगे कृत्तिका नक्षत्र में गोचर, 20 दिनों तक इन राशि वालों को मिलेगा जबरदस्त लाभ
Surya Grahan 2026: साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, जानिए कब, कहां और क्या भारत में दिखेगा ग्रहण का दुर्लभ नजारा ?
विज्ञापन

कालसर्प दोष
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब जन्म कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तब कालसर्प दोष का निर्माण माना जाता है। इसे जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं, मानसिक तनाव, कार्यों में देरी और संघर्षों से जोड़ा जाता है। कालसर्प दोष के कई प्रकार बताए गए हैं, जिनका प्रभाव व्यक्ति की कुंडली के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

उपाय

  • घर, रसोई और स्नानघर की नियमित सफाई रखें।
  • परिवार और रिश्तेदारों, विशेषकर ससुराल पक्ष के साथ मधुर संबंध बनाए रखें।
  • जरूरतमंद और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की सहायता करें।
  • मंदिर या धार्मिक स्थल की सेवा करें।
  • प्रतिदिन चंदन का तिलक लगाएं और मां सरस्वती की उपासना करें।
  • योग्य ज्योतिषी की सलाह से मंगल या गुरु से जुड़े उपाय कर सकते हैं।
विज्ञापन

3 of 7
कुंडली में मंगलदोष कैसे बनता है। - फोटो : अमर उजाला
मंगल दोष
जब मंगल ग्रह जन्म कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होता है, तब मांगलिक या मंगल दोष माना जाता है। यह दोष विशेष रूप से वैवाहिक जीवन, स्वभाव और पारिवारिक संबंधों को प्रभावित करने वाला माना जाता है।

उपाय

  • नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • नीम के वृक्ष की पूजा करें और गुड़ का दान करें।
  • क्रोध पर नियंत्रण रखें और अच्छे आचरण का पालन करें।
  • मांसाहार और नशे से दूरी बनाए रखें।
  • भाई-बहनों और जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर रखें।
  • अविवाहित जातक परंपरागत मान्यताओं के अनुसार कुंभ विवाह जैसे उपाय कर सकते हैं।

4 of 7
ज्योतिष में कुछ विशेष ग्रह स्थितियों को पितृ दोष का कारण बताया गया है। - फोटो : adobe stock

पितृ दोष

पितृ दोष को पूर्वजों से जुड़े कर्मों और उनकी असंतुष्टि से संबंधित माना जाता है। ज्योतिष में कुछ विशेष ग्रह स्थितियों को पितृ दोष का कारण बताया गया है। मान्यता है कि इसके कारण जीवन में उन्नति में बाधाएं, पारिवारिक समस्याएं और आर्थिक परेशानियां आ सकती हैं।

उपाय

  • प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • कुलदेवी और कुलदेवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
  • श्राद्ध पक्ष में तर्पण और पितरों का स्मरण करें।
  • पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखें।
  • धार्मिक स्थलों पर पितृ शांति से जुड़े अनुष्ठान करवा सकते हैं।
विज्ञापन

5 of 7
गुरु चांडाल दोष - फोटो : amar ujala
गुरु चांडाल दोष
जब कुंडली में बृहस्पति और राहु एक ही भाव में स्थित होते हैं, तब गुरु चांडाल दोष बनता है। इसे ज्ञान, निर्णय क्षमता, शिक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा पर प्रभाव डालने वाला योग माना जाता है।

उपाय:

  • प्रतिदिन केसर, हल्दी या चंदन का तिलक लगाएं।
  • मछलियों को साबुत मूंग या उड़द खिलाएं।
  • गुरुवार का व्रत रखें और पीली वस्तुओं का दान करें।
  • पीले वस्त्र धारण करें तथा सात्विक जीवनशैली अपनाएं।
  • गुरु और राहु से संबंधित मंत्रों का जाप योग्य मार्गदर्शन में करें।
विज्ञापन

6 of 7
चंद्रमा-शनि की युति से बना विष योग - फोटो : अमर उजाला
विष दोष
कुंडली में चंद्रमा और शनि की युति होने पर विष दोष या विष योग माना जाता है। यह योग मानसिक तनाव, भावनात्मक अस्थिरता और जीवन में संघर्ष बढ़ाने वाला माना जाता है।

उपाय

  • पंचमी तिथि, विशेषकर नाग पंचमी के दिन व्रत रखें।
  • नाग देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
  • श्रीसर्प सूक्त और धार्मिक ग्रंथों का पाठ या श्रवण करें।
  • घर में समय-समय पर कपूर जलाएं और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।
  • चंदन का तिलक लगाकर नियमित पूजा-पाठ करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा और अभिषेक करें। - फोटो : अमर उजाला।
केन्द्राधिपति दोष
ज्योतिष में कुछ विशेष लग्नों में शुभ ग्रहों के केंद्र भावों में स्थित होने से केन्द्राधिपति दोष बनने की बात कही जाती है। यह दोष व्यक्ति की प्रगति, निर्णय क्षमता और जीवन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बाधाएं उत्पन्न कर सकता है।

उपाय

  • प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा और अभिषेक करें।
  • नियमित रूप से "ॐ नमो नारायणाय" मंत्र का जाप करें।
  • "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का कम से कम 11 बार जप करें।
  • धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग लें।
  • सकारात्मक सोच और सदाचार को जीवन का हिस्सा बनाएं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें