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Numerology: 35 की उम्र पार करते ही बदल जाती है किस्मत, शनि की कृपा से मूलांक 8 वाले बनते हैं करोड़पति

Sat, 28 Jun 2025 05:30 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shani Blessings By Birth Date: अंक ज्योतिष में मूलांक 8 के स्वामी शनि होते हैं, जो जातकों को जीवन में संघर्ष के बाद 40 की उम्र के बाद बड़ा फल देते हैं। यह अंक धीमी लेकिन स्थायी सफलता और गहरी सीख का प्रतीक माना जाता है।
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Shani Dev Blessing On Mulank 8 - फोटो : adobe stock
Shani Dev Blessing On These Mulank: अंक ज्योतिष में हर व्यक्ति का एक मूलांक होता है, जो उसकी जन्मतिथि के अंकों के जोड़ से निकलता है। जैसे अगर कोई 8, 17 या 26 तारीख को पैदा हुआ है, तो उसका मूलांक 8 होता है। मूलांक 8 के स्वामी होते हैं शनि देव, जो कर्म, अनुशासन और विलंबित लेकिन मजबूत सफलता के ग्रह माने जाते हैं। इन लोगों पर शनि का गहरा प्रभाव होता है, और कई बार जीवन में चुनौतियां भी आती हैं लेकिन अंत में यही ग्रह उन्हें देर से, पर दमदार सफलता देता है। 
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मूलांक 8 के जातक अपने परिश्रम और अनुभव से धन, प्रतिष्ठा और सामाजिक सम्मान अर्जित करते हैं। शनि देव इन पर विशेष कृपा रखते हैं और अक्सर 35–40 की उम्र के बाद इनका जीवन स्थिर और समृद्ध होने लगता है। 
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शुरुआती जीवन में संघर्ष - फोटो : istock
शुरुआती जीवन में संघर्ष
मूलांक 8 वालों का जीवन एक गहरी परीक्षा की तरह होता है, खासकर उनके शुरुआती वर्षों में। बचपन से ही इन्हें परिस्थितियों से जूझना पड़ता है — चाहे वह आर्थिक तंगी हो, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ हों, या पढ़ाई-करियर में बाधाएँ। 20 से 30 वर्ष की उम्र के बीच ऐसा महसूस होता है मानो हर सफलता इन्हें दूसरों से कहीं ज़्यादा मेहनत के बाद ही मिलती है। दूसरों की तुलना में इन्हें हर चीज़ के लिए दो गुना परिश्रम करना पड़ता है। कई बार ये जातक निराशा के गर्त में भी गिरते हैं, लेकिन फिर भी हार नहीं मानते। जीवन उन्हें जितना गिराने की कोशिश करता है, उतना ही ये लोग भीतर से मजबूत होते जाते हैं। यही संघर्ष काल उनके व्यक्तित्व को निखारता है और उन्हें भविष्य की बड़ी उड़ान के लिए तैयार करता है।
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35 की उम्र के बाद चमकने लगता है भाग्य - फोटो : freepik
35 की उम्र के बाद चमकने लगता है भाग्य
जब मूलांक 8 के जातक 35 की उम्र के आसपास पहुंचते हैं, तब उनका भाग्य करवट लेना शुरू करता है। अब तक की सारी मेहनत और सीख उन्हें धीरे-धीरे रंग दिखाने लगती है। इसी उम्र के बाद शनि का प्रभाव, जो पहले धीमा और कठोर था, अब सहयोगी बन जाता है। शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या इस वक्त उनके लिए किसी वरदान की तरह काम करती है। करियर में प्रमोशन मिलना, नई नौकरी के अवसर, कारोबार में मुनाफा या लोगों के बीच अपनी पहचान बनना, ये सारी बातें अचानक होने लगती हैं। जो पहले संघर्षों में उलझे रहते थे, अब उन्हें उनके काम का फल मिलने लगता है। इस समय तक जातकों की सोच भी काफी परिपक्व हो चुकी होती है, जिससे वे मौके पहचान पाते हैं और उनका सही उपयोग कर पाते हैं।

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जब शनि प्रसन्न होते हैं, तब बदलता है भाग्य - फोटो : adobe
जब शनि प्रसन्न होते हैं, तब बदलता है भाग्य
शनि को न्यायप्रिय और कर्म के देवता कहा जाता है। वे उन पर ही कृपा करते हैं, जो अनुशासित, ईमानदार और परिश्रमी होते हैं  और मूलांक 8 वाले इन गुणों को धीरे-धीरे आत्मसात कर ही लेते हैं। जब शनि देव प्रसन्न होते हैं, तो उनका आशीर्वाद जीवन में चमत्कारी परिवर्तन लेकर आता है। कई बार देखा गया है कि ऐसे जातक जो वर्षों तक संघर्ष कर रहे थे, अचानक सफल उद्यमी, प्रतिष्ठित अधिकारी या धनवान व्यक्ति बन जाते हैं। रातों-रात जीवन की दिशा और दशा बदल जाती है। लेकिन यह सफलता हवा में उड़ती नहीं, बल्कि मजबूत नींव पर टिकी होती है क्योंकि इसे वर्षों की मेहनत, धैर्य और आत्म-संशोधन से प्राप्त किया गया होता है। इसीलिए मूलांक 8 वालों की सफलता स्थायी, सम्मानजनक और समाज को प्रेरित करने वाली होती है।
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आत्मविश्वास और निर्णय की ताकत - फोटो : freepik
आत्मविश्वास और निर्णय की ताकत 
मूलांक 8 के जातकों की सोच उम्र के साथ परिपक्व होती जाती है। 30 की उम्र तक आते-आते वे जीवन के कई अनुभवों से गुज़र चुके होते हैं । इन सबका असर ये होता है कि उनकी निर्णय लेने की क्षमता अत्यंत सटीक और सधी हुई हो जाती है। वे हर पहलू को गहराई से सोचते हैं, और जल्दबाज़ी से दूर रहते हैं। उनका आत्मविश्वास भीतर से उपजा होता है, किसी बाहरी दिखावे का नहीं। यही आत्मबल और निर्णय शक्ति उन्हें भीड़ से अलग बनाती है। फिर चाहे वह व्यापारिक निर्णय हो, करियर की दिशा बदलनी हो, या निजी जीवन में कोई बड़ा कदम ये लोग सोच-समझकर सही वक्त पर सही चुनाव करते हैं, और यही उन्हें सफलता के शिखर पर ले जाता है।
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समाज में बढ़ता है मान-सम्मान - फोटो : freepik
समाज में बढ़ता है मान-सम्मान
जैसे-जैसे मूलांक 8 वाले लोग अपने जीवन में स्थिरता और सफलता की ओर बढ़ते हैं, वैसे-वैसे उनका सामाजिक कद भी ऊँचा होता जाता है। पहले जिन्हें कोई नहीं जानता था, वही अब सम्मानित व्यक्तित्व बन जाते हैं। लोग उनकी बातें सुनते हैं, सलाह लेते हैं, और उन्हें एक मार्गदर्शक की भूमिका में देखना पसंद करते हैं। यह सम्मान सिर्फ पैसे से नहीं, उनके व्यक्तित्व की गंभीरता, ईमानदारी और सोच की गहराई से आता है। ये लोग समाज में योगदान देना भी शुरू करते हैं।  कोई स्कूल खोलता है, कोई जरूरतमंदों की मदद करता है, तो कोई युवा पीढ़ी को जीवन का सही रास्ता दिखाता है। धीरे-धीरे ये लोग समाज में प्रेरणा का स्रोत बन जाते हैं, और यही उनकी असली पहचान होती है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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