देव गुरु बृहस्पति ज्ञान और संतान के कारक हैं। ये धनु और मीन राशि के स्वामी हैं। कर्क राशि में गुरु उच्च के, और मकर राशि में नीच के माने जाते हैं। बृहस्पति ग्रह 20 नवंबर, शुक्रवार को दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर अपनी नीच राशि मकर में प्रवेश कर रहे हैं। मकर राशि में शनि पहले ही मौजूद हैं। इस राशि में शनि और गुरु की एक साथ युति अप्रत्याशित परिणाम दिलाने वाली सिद्ध हो सकती है। गुरु के इस गोचर का प्रभाव सभी राशियों पर शुभ-अशुभ रूप में पड़ेगा। गुरु गोचर के शुभ प्रभाव से जातक कई क्षेत्रों में सफलता पाता है। वहीं अशुभ प्रभाव से विविध क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। गुरु के राशि परिवर्तन से होने वाले अशुभ प्रभाव से बचने के लिए ज्योतिष शास्त्र में उपाय बताए गए हैं। ये उपाय इस प्रकार हैं -