गणेश चतुर्थी इस वर्ष 17 सितंबर को है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर ऐसा दुर्लभ योग बना हुआ है जो भक्तों के लिए मंगलकारी और शुभ फलदायी है।
विज्ञापन
गणेश चतुर्थी पर बना दुर्लभ संयोग, भक्तों की मुराद पूरी करेंगे
2 of 7
गणेश सभी गणों, ॠद्धियों और सिद्धियों के स्वामी हैं जो सरल पूजा-पाठ से ही प्रसन्न होकर अपने भक्तों का अभीष्ट फल प्रदान करते हैं।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पंचभूतों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश में पृथ्वी शिव, जल गणेश, तेज-अग्नि शक्ति, वायु सूर्य और आकाश विष्णु हैं इन पांच तत्वों के वगैर जीव-जगत की कल्पना नहीं की जा सकती।
विज्ञापन
गणेश चतुर्थी पर बना दुर्लभ संयोग, भक्तों की मुराद पूरी करेंगे
3 of 7
जल तत्व के अधिपति गणेश हर जीव में रक्त रूप में विराजते हुए चारों देवों सहित पंचायतन में पूज्य हैं जैसे श्रृष्टि का कोई भी शुभ-अशुभ कार्य जल के बिना पूर्ण नहीं हो सकता वैसे ही गणेश पूजन के बिना कोई भी जप-तप, अनुष्ठान आदि कर्म पूर्ण नहीं नहीं हो सकते।
गणेश चतुर्थी पर बना दुर्लभ संयोग, भक्तों की मुराद पूरी करेंगे
4 of 7
ज्योतिषशास्त्र में अश्विनी आदि सभी नक्षत्रों के अनुसार देवगण, मनुष्यगण और राक्षसगण इन तीनो गणों के ईश गणेश ही हैं।'ग' ज्ञानार्थवाचक और 'ण' निर्वाणवाचक है 'ईश' अधिपति हैं अर्थात ज्ञान-निर्वाणवाचक गण के ईश गणेश ही परब्रह्म हैं।
विज्ञापन
गणेश चतुर्थी पर बना दुर्लभ संयोग, भक्तों की मुराद पूरी करेंगे
5 of 7
योग-शास्त्रीय साधना में शरीर में मेरुदंड के मध्य जो सुषुम्ना नाडी है, वह ब्रह्मरंध्र में प्रवेश करके मष्तिष्क के नाडी समूह से मिलजाती है इसका आरम्भ मूलाधार चक्र ही है इसी 'मूलाधार चक्र' को गणेश स्थान कहते इन्द्रियों के स्वामी होने से भी इन्हें गणेश कहा गया है।
विज्ञापन
गणेश चतुर्थी पर बना दुर्लभ संयोग, भक्तों की मुराद पूरी करेंगे
6 of 7
इनका सिर हाथी का और वाहन मूषक है। ये पाश, अंकुश और वरमुद्रा धारण करते हैं पाश मोह का प्रतीक है जो तमोगुण प्रधान है अंकुश वृत्तियों का प्रतीक है जो रजोगुण प्रधान है वरमुद्रा सत्वगुण का प्रतीक है इनकी उपासना करके प्राणी तमोगुण, रजोगुण और सतोगुण से ऊपर उठकर इनकी कृपा का पात्र बनता है।
गणेश चतुर्थी पर बना दुर्लभ संयोग, भक्तों की मुराद पूरी करेंगे
7 of 7
इस बार गणेश के जन्म नक्षत्र स्वाति में ही है। यह एक दुर्लभ संयोग है, इसलिए इस वर्ष की विनायक आराधना का फल परम शुभकारी होगा। इस अति शुभफल कारी सिद्धिविनायक चतुर्थी का भक्ति-भाव से पूजन करके अपने सकल मनोरथ सिद्ध कर सकते हैं।