शनि शिंगणापुर में वर्षों की परंपरा टूटी है और अब महिलाओं को भी शनि महाराज की पूजा का अधिकार प्राप्त हो गया है। महिलाएं अब शनि महाराज का तैलाभिषेक कर शनि महाराज की कृपा पा सकेंगी। और यह फैसला तब आया है जब संवत् बदला है और संवत् की सत्ता शुक्र के हाथों में आई। शुक्र को स्त्री कारक ग्रह माना गया। शुक्र के संवत् का राजा होने के कारण महिलाओं के पक्ष में यह बड़ा फैसला आया है। नव संवत् और शुक्र के राजा बनने से और क्या क्या होगा यह भी जान लीजिए।
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महिलाओं को मिला शिंगणापुर में पूजा का अधिकार, ये है कारण
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आपको याद होगा कि 26 जनवरी को 400 साल पुरानी प्रथा को चुनौती देते हुए महिलाओं ने शनि धाम शिंगणापुर में शनि महाराज का तैलाभिषेक किया। इसके बाद से एक नए विवाद ने जन्म लिया कि आखिर लिंग के आधार पर महिलाओं को मंदिर और दरगाहों में प्रवेश से रोका क्यों जाए।
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मामला अदालत के पास पहुंचा और अब मंदिरों और दरगाहों पर पुरुषों के समान महिलाओं को प्रवेश और पूजा का अधिकार को लेकर फैसले का इंतजार हो रहा है। अब जब नवग्रहों में न्यायाधीश शनि को लेकर मामला छिड़ चुका है तो इसका फैसला भी ग्रह ही करेंगे और यह सब क्यों हो रहा है यह भी आपको ग्रह ही बताएंगे।
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ज्योतिषीय गणना के अनुसार नया संवत् 2073 जो 8 अप्रैल से शुरू हुअा है उसका राजा शुक्र है और इनका मंत्री बुध। शुक्र का संबंध स्त्री से माना गया है और जब शुक्र राजा होता है तो स्त्रियों का प्रभाव बढ़ता है उस वर्ष स्त्रियों से संबंधित मामलों में कई बड़े फैसले और उपलब्धियां सामने आती हैं।
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इस वर्ष भी कुछ ऐसा ही होने वाला है। महिलाओं के हक में कई बड़े फैसले आ सकते हैं संवत् के पहले दिन ही शिंगणापुर ट्रस्ट की तरफ से महिलाओं को पूजा का अधिकार मिलना शुक्र का पहला असर है। हलांकि शुक्र के राजा बनने से इस साल स्त्री पुरुषों के परस्पर संबंधों में अधिक खुलापन एवं अर्मायादित व्यवहार भी सामने आएंगे। फिल्म जगत भी मर्यादाओं को ताक पर रखकर मनोरंजन परोसेगा। भोग विलास, श्रृंगार, फैशन के बाजार में तेजी रहेगी।
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अब प्रश्न उठता है कि इस समय महिलाएं क्यों मुखर हुई हैं और धर्म पर सवाल खड़े कर रही हैं तो इसका जवाब यह है कि धर्म के कारक गुरु इन दिनों राहु के साथ हैं और केतु की इस पर दृष्टि है जो मर्यादाओं को तोड़ने का काम करता है। और यही चीजों यहां देखने को मिल रही है।