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Grah Dasha: कुंडली में इन ग्रह दशाओं के योग से मिलती है नौकरी, व्यवसाय और राजनीति में सफलता

Fri, 03 Dec 2021 07:17 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ग्रहों की दशा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
Grah Dasha: जैसा कि हम जानते हैं, ग्रहों की दशा को  वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। ऐसा माना जाता है कि हमारे जीवन में जो कुछ भी घटित होता है वह किसी विशेष गृह की दशा के प्रभाव के कारण होता है। कुंडली में किसी घटना के होने या न होने की पुष्टि उस विशेष समय पर प्रमुख महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा पर निर्भर करती है। अच्छे ग्रहों की स्थिति जहां जीवन में सुख, समृद्धि और प्रगति के द्वार खोलती है, वहीं अशुभ ग्रहों की स्थिति जीवन में बहुत सारी समस्याएं पैदा करती है। ये शुभ और अशुभ ग्रह प्रत्येक कुंडली पर विभिन्न स्थान ले सकते हैं। वैदिक ज्योतिष में दशा बहुत महत्वपूर्ण हैं और वे किसी व्यक्ति के जीवन काल में होने वाली सभी प्रकार की अच्छी और बुरी स्थितियों का पूरा क्रम दिखाने में सक्षम हैं। व्यक्ति के जीवन में कब अच्छा समय आएगा और कब बुरा समय आएगा, वह जीवन में कब उन्नति करेगा और कब कष्ट सहना पड़ेगा, यह सब परिस्थितियों के प्रभाव से ही संभव है। कुंडली में कई बार कुछ ऐसे  ग्रह दशा और योग बनते हैं जो आपको अचानक सफलता के पद पर पहुंचा देते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ ग्रह दशाओं के बारे में जो आपको हर क्षेत्र फिर चाहे वह नौकरी हो, बिजनेस हो या फिर राजनीति  सभी में सफलता दिलाते हैं। 
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राजनीति में सफलता दिलाने वाली दशा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : kundali
राजनीति में सफलता दिलाने वाली दशा 
अगर आप कभी सफल राजनेताओं की कुंडली देखेंगे तो आप पाएंगे कि सफल राजनेताओं की कुण्डली में राहु का संबध षष्ठम, सप्तम, दशमेश और एकादश भाव में होते हैं।  कुण्डली का दसम या दशमेश भाव राजनीति का भाव कहा जाता है। यदि कोई राजनीति में सफल होना चाहता है तो इसके लिए उसके दशम भाव में उच्च का  ग्रह होना आवश्यक है। यदि दशमेश का सप्तम भाव से संबंध होता है तो व्यक्ति राजनीति में सफलता प्राप्त करता है। चूंकि षष्ठम भाव सेवा का होता तो इसका भी सीधा संबंध दशमेश से होना चाहिए जब व्यक्ति में सेवभाव होता है तभी व्यक्ति राजनीति में सफलता प्राप्त करता है। 
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व्यवसाय या नौकरी में सफलता दिलाने वाली दशा  (प्रतीकात्मक तस्वीर)
व्यवसाय या नौकरी में सफलता दिलाने वाली दशा  
सफल व्यवसायियों या नौकरीपेशा व्यक्तियों की कुंडली में आपको अमात्यकारक दशा  देखी जाती है। अमात्यकारक दशा में द्वितीय भाव को पंचम, नवम तथा दशमेश भाव का कारक ग्रह माना गया है। द्वित्तीय भाव से कुटुम्ब, पंचम से शि़क्षा तथा लक्ष्मी स्थान, नवम भाव से भाग्य, दशम से व्यवसाय का स्वरुप देखा जाता है। इसके अतिरिक्त अमात्यकारक का संबंध धन तथा शिक्षा से भी माना गया है।  यदि कुण्डली में आत्मकारक बली है तब व्यक्ति को जीवन में कठिनाइयों का सामना कम करना होगा और वह जीवन में निरन्तर तरक्की करता रहेगा। 

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दशानाथ का प्रभाव (प्रतीकात्मक तस्वीर)
दशानाथ का प्रभाव 
किसी भी सफलता को प्राप्त करने के लिए गोचर का सहयोग भी आवश्यक है। इसमें दशनतः का गोचर काफी प्रभावी होता है। अन्तर्दशानाथ आपको तभी शुभ फल प्रदान करेगा जब वह गोचर में दशनाथ से पंचम, नवम भाव में हो और साथ ही उच्च का हो, स्वग्रही  या फिर मित्रराशि में हो। इससे दशा विशेष में इच्छित फल प्राप्त की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
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वर्ग कुंडलियों का कारक भी महत्वपूर्ण (प्रतीकात्मक तस्वीर)
वर्ग कुंडलियों का कारक भी महत्वपूर्ण
कुंडली में यदि आपको छोटी छोटी से छोटी जानकारी चाहिए तो इसके लिए वर्ग कुंडली का प्रयोग किया जाता है। वर्ग कुंडली का प्रयोग खासकर ग्रहों के बल की गणना के लिए किया जाता है। सामान्य तौर पर जो ग्रह जितने ज्यादा उच्च वर्ग, मित्र वर्ग और शुभ ग्रहों के वर्ग पाता है वह उतना ही शुभ फल देता है और सफलता प्रदान करता है। वर्ग कुंडलियों के आधार पर नवांश भाव में कोई भी ग्रह अगर उच्च का होगा तो वह सफलता प्रदान करने वाला होता है फिर चाहे वही सफलता राजनीति से जुड़ी हो या व्यवसाय या नौकरी से जुड़ी हो। लेकिन अगर कोई ग्रह कुण्डली में उच्च का भी हो पर नवांश में नीच का हो तो वह ग्रह कुछ खास शुभ फल नहीं दे पाएगा। 
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