तुला राशि शनि की उच्च राशि मानी जाती है जबकि मेष इसकी नीच राशि मानी जाती है।
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ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह का महत्व
वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह का बड़ा महत्व है। हिन्दू ज्योतिष में शनि ग्रह को आयु, दुख, रोग, पीड़ा, विज्ञान, तकनीकी, लोहा, खनिज तेल, कर्मचारी, सेवक, जेल आदि का कारक माना जाता है। शनि ग्रह मकर और कुंभ राशि का स्वामी है। तुला राशि शनि की उच्च राशि मानी जाती है जबकि मेष इसकी नीच राशि मानी जाती है। शनि का गोचर एक राशि में ढाई वर्ष तक रहता है। नौ ग्रहों में शनि की गति सबसे मंद है। शनि की दशा साढ़े सात वर्ष की होती है जिसे शनि की साढ़े साती कहा जाता है।