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Chandrama aur Jyotish: विवाह में चंद्रमा का महत्व, जानें कुंडली मिलान में क्या है इसकी भूमिका

Wed, 23 Aug 2023 11:57 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कुंडली मिलान में चंद्रमा की भूमिका - फोटो : अमर उजाला
Chandrama aur Jyotish: ज्योतिष में चंद्रमा ग्रह वैदिक ज्योतिष और हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण और प्रमुख भूमिका निभाता है। खगोलीय दृष्टि से, चंद्रमा एक ग्रह नहीं है, हालांकि, वैदिक ज्योतिष में इसे एक ग्रह माना जाता है। । जातक की जन्म कुंडली में चंद्रमा "मां " का प्रतिनिधित्व करता है। ज्योतिष में चतुर्थ भाव का स्वामित्व होने के कारण इसे घर भी माना जाता है। यह व्यक्ति के मन, स्थानीय सरकार या निजी नौकरियों का प्रतिनिधित्व करता है। जहां सूर्य जातक के सार्वजनिक जीवन और समाज में उच्च पद पर होने का संकेत देता है वहीं चंद्रमा पारिवारिक जीवन, घर और व्यक्तिगत और निजी मामलों को दर्शाता है। भारतीय परंपरा में विवाह से पहले वर-वधु की  कुंडली का मिलान किया जाता है। यह मिलान भी कुंडली में चंद्रमा कि स्थिति को देखकर ही किया जाता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार चंद्रमा मन का सीधा कारक माना जाता है और विवाह दो मनों का पारस्परिक मेल है। आइए जानते हैं कुंडली मिलान में क्या है इसकी भूमिका। 
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कुंडली मिलान में चंद्रमा की भूमिका
कुंडली मिलान में चंद्रमा की भूमिका 
कुंडली मिलान का मुख्य उद्देश्य दो व्यक्तियों को एक जोड़े के रूप में एक साथ लाना है जहां उनके वैवाहिक जीवन में प्रेम, समर्पण और आपसी समझ ताउम्र बनी रहे। कुंडली मिलान में चंद्र राशियों की प्रधानता होती है क्योंकि चंद्रमा मन को दर्शाता है, हमारी भावनाओं को नियंत्रित करता है और मानसिक अनुकूलता हमारी शारीरिक अनुकूलता से अधिक महत्वपूर्ण होती है। जैसा की हम सब जानते ही है शादी जन्म-जन्मांतर से जुड़ा दो आत्माओं का पवित्र मिलन है।
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कुंडली मिलान में चंद्रमा की भूमिका - फोटो : facebook
कैसे किया जाता है चंद्रमा के आधार पर कुंडली मिलान 
 चंद्रमा के स्थान की स्थिति के आधार पर वर-वधु की कुंडली का मिलान किया जाता है। जैसे यदि दूल्हे का चंद्रमा वधू से 2, 3, 4, 5, 6 स्थान पर हो तो जोड़ी ख़राब मानी जाती है। वही यदि चंद्रमा की स्थिति 7 और 12 में हो तो यह एक शुभ मेल का संकेत देती है । दूसरी ओर वधु की चंद्रमा की स्थिति वर की चंद्रमा की स्थिति से अच्छे मेल का संकेत देते हैं। वधू की चन्द्रमा की स्थिति वर की चन्द्रमा से 12वें स्थान में हो तो यह मिलान अच्छा नहीं माना जाता। वही 2, 3, 4, 5, 6 , 7 स्थान अच्छे माने जाते हैं। 
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कुंडली मिलान में चंद्रमा की भूमिका
चंद्रमा की स्थिति से ही देखे जाते हैं गंड मूल दोष 
 कुंडली में चंद्रमा कि स्थिति से प्रचलित गंड मूल दोष भी देखे जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में चंद्रमा कि स्थिति मन और भावनाओं को नियंत्रित करती है । चंद्रमा के कुंडली में बलशाली होने पर धारक स्वभाव से मृदु, संवेदनशील, भावुक तथा अपने आस-पास के लोगों से स्नेह रखने वाला होता है। स्वभाव से ऐसे लोग चंचल तथा संवेदनशील होते हैं। अपने प्रियजनों का बहुत ध्यान रखते हैं।
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