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Navratri 2022: मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि में इस स्त्रोत का करें पाठ, घर में होगा सुख और समृद्धि का वास

Tue, 22 Mar 2022 07:14 PM IST
आशिकी पटेल ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि में इस स्त्रोत का करें पाठ - फोटो : iStock
Chaitra Navratri 2022: नवरात्रि का महापर्व देश भर में काफी धूम-धाम से मनाया जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि का ये पावन पर्व 2 अप्रैल 2022 से शुरू होगा और 11 अप्रैल 2022 तक चलेगा। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान पूरी श्रद्धा से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से वो अपने भक्तों पर प्रसन्न होती हैं। साथ ही उनकी सारी मनोकामनाएं भी पूरी करती हैं। मां दुर्गा को धन की देवी लक्ष्मी का भी स्वरूप माना जाता है। मां लक्ष्मी की कृपा से व्यक्ति को धन लाभ होता है और जीवन में सभी तरह के सुखों की प्राप्ति होती है। ऐसे में नवरात्रि के दौरान विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इसके अलावा मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अष्टलक्ष्मी स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। इस पाठ को करने से घर में सुख और समृद्धि आती है और दरिद्रता दूर होती है।  
आदि लक्ष्मी
सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि चंद्र सहोदरि हेममये।
मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायिनी मंजुल भाषिणि वेदनुते।
पङ्कजवासिनि देवसुपूजित सद-गुण वर्षिणि शान्तिनुते।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि आदिलक्ष्मि परिपालय माम्।
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मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि में इस स्त्रोत का करें पाठ - फोटो : iStock
धान्य लक्ष्मी
अयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनि वैदिक रूपिणि वेदमये।
क्षीर समुद्भव मङ्गल रुपिणि मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते।
मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि देवगणाश्रित पादयुते।
जय जय हे मधुसूदनकामिनि धान्यलक्ष्मि परिपालय माम्।
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मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि में इस स्त्रोत का करें पाठ - फोटो : iStock
धैर्य लक्ष्मी
जयवरवर्षिणि वैष्णवि भार्गवि मन्त्र स्वरुपिणि मन्त्रमये।
सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद ज्ञान विकासिनि शास्त्रनुते।
भवभयहारिणि पापविमोचनि साधु जनाश्रित पादयुते।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि धैर्यलक्ष्मि सदापालय माम्।

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मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि में इस स्त्रोत का करें पाठ - फोटो : iStock
गज लक्ष्मी
जय जय दुर्गति नाशिनि कामिनि वैदिक रूपिणि वेदमये।
रधगज तुरगपदाति समावृत परिजन मंडित लोकनुते।
हरिहर ब्रम्ह सुपूजित सेवित ताप निवारिणि पादयुते।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि गजलक्ष्मि रूपेण पालय माम्।
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मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि में इस स्त्रोत का करें पाठ - फोटो : iStock
सन्तान लक्ष्मी
अयि खगवाहिनी मोहिनि चक्रिणि रागविवर्धिनि ज्ञानमये।
गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि सप्तस्वर भूषित गाननुते।
सकल सुरासुर देव मुनीश्वर मानव वन्दित पादयुते।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि सन्तानलक्ष्मि परिपालय माम्।
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मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि में इस स्त्रोत का करें पाठ - फोटो : iStock
विजय लक्ष्मी
जय कमलासनि सद-गति दायिनि ज्ञानविकासिनि गानमये।
अनुदिन मर्चित कुङ्कुम धूसर भूषित वसित वाद्यनुते।
कनकधरास्तुति वैभव वन्दित शङ्करदेशिक मान्यपदे।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि विजयक्ष्मि परिपालय माम्।
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मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि में इस स्त्रोत का करें पाठ - फोटो : iStock
विद्या लक्ष्मी
प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि शोकविनाशिनि रत्नमये।
मणिमय भूषित कर्णविभूषण शान्ति समावृत हास्यमुखे।
नवनिद्धिदायिनी कलिमलहारिणि कामित फलप्रद हस्तयुते।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि विद्यालक्ष्मि सदा पालय माम्।

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मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि में इस स्त्रोत का करें पाठ - फोटो : iStock
धन लक्ष्मी
धिमिधिमि धिन्धिमि धिन्धिमि-दिन्धिमी दुन्धुभि नाद सुपूर्णमये।
घुमघुम घुङ्घुम घुङ्घुम घुङ्घुम शङ्ख निनाद सुवाद्यनुते।
वेद पुराणेतिहास सुपूजित वैदिक मार्ग प्रदर्शयुते।
जय जय हे कामिनि धनलक्ष्मी रूपेण पालय माम्।
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मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि में इस स्त्रोत का करें पाठ - फोटो : iStock
अष्टलक्ष्मी नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विष्णुवक्षःस्थलारूढे भक्तमोक्षप्रदायिनी।।
शङ्ख चक्र गदाहस्ते विश्वरूपिणिते जयः।
जगन्मात्रे च मोहिन्यै मङ्गलम शुभ मङ्गलम।
।इति श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम सम्पूर्णम।
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