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क्या आपकी कुंडली में है यह राजयोग, जो बना सकता है आपको राजा

Mon, 24 Aug 2020 03:13 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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कुंडली में राजयोग - फोटो : rajyog
कुंडली में ग्रह नक्षत्रों की चाल तय करती है कि आपका भविष्य और वर्तमान कैसा होगा। कुंडली में नौवें स्थान को भाग्य का और दसवें स्थान को कर्म का स्थान माना गया है। इसलिए अगर आपके नौवें और दसवें भाव में ग्रहों की स्थिति सही होती है, तो व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुसार राजयोग बन सकता है। कुंडली में नौवें और दसवें स्थान का बहुत महत्व माना गया है। जिस व्यक्ति की कुंडली में राजयोग बनता है उसे सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं ऐसे व्यक्ति राजा के समान जीवन व्यतीत करते हैं। राजयोग के बारे में जानने के लिए लग्न के आधार पर कुंडली का विचार किया जाता है। जानते हैं कि कुंडली में कैसे बनता है राजयोग....
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प्रतीकात्मक तस्वीर
मेष लग्न की कुंडली में अगर मंगल ग्रह और बृहस्पति भाग्य भाव यानि नौवें और कर्म भाव अर्थात् दसवें भाव में होते हैं, तो ग्रहों की यह स्थिति कुंडली में राजयोग का निर्माण करती है। 
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कुंडली में राज योग प्रतीकात्मक तस्वीर

वृष लग्न के जातको की कुंडली में नौवें और दसवें स्थान में शुक्र और शनि ग्रह मजबूत स्थिति में विराजमान होते हैं तो ऐसे में जातक की कुंडली में राजयोग का निर्माण होता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर
मिथुन लग्न की कुंडली में जब बुध या शनि ग्रह नौवें या दसवें भाव में एक साथ विराजते हैं, तो ऐसे व्यक्ति को अपने जीवन में किसी भी तरह से धन संबंधित परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है ऐसे व्यक्ति राजाओं के समान जीवन जीते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
कर्क लग्न वाले जातको की कुंडली में जब चंद्रग्रह और बृहस्पति आपके भाग्य या कर्म भाव में हो तब यह केंद्र त्रिकोंण राज योग का कारक बनता है। जातक को किसी प्रकार का कोई अभाव नहीं रहता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
सिंह लग्न की कुंडली में अगर नौवें और दसवें भाव में जब सूर्य और मंगल अच्छी स्थिति में मौजूद होते हैं, तो जातक के की कुंडली में राज योग का योग बनता है। कुंडली में राजयोग बनने पर व्यक्ति को हर तरह का सुख प्राप्त होता है। 
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कुंडली में राजयोग (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कन्या लग्न में के जातक की कुंडली के नौवें और दसवें स्थान (भाग्य और कर्म भाव) में जब बुध और शुक्र एक साथ उपस्थित हो तब राजयोग का निर्माण होता है। 

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कुंडली (प्रतीकात्मक तस्वीर)
तुला लग्न के लोगों की कुंडली में जब भाग्य और कर्म स्थान में शुक्र एवं बुध अगर एक साथ आ जाते है, तो ऐसे में व्यक्ति को ग्रहों की यह स्थिति जीवन में हर तरह के सुख प्रदान करती है। 

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कुंडली (प्रतीकात्मक तस्वीर)
वृश्चिक लग्न वालों की कुंडली में अगर सूर्य और मंगल ग्रह नौवें और दसवें स्थान में एक साथ विराजते हैं तो व्यक्ति राजा के समान सुख प्राप्त करता है। कुंडली में भाग्य और कर्म भाव में चंद्रमा और मंगल के मजबूत स्थिति में होने पर भी शुभ फल की प्राप्ति के योग बनते हैं।

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कुंडली (प्रतीकात्मक तस्वीर)
धनु लग्न वालों के लिए बृहस्पति और सूर्यग्रह को राजयोग का कारक माना गया है ऐसे में अगर नौवें या दसवें स्थान पर ये दोनों ग्रह एक साथ उपस्थित हो तो ग्रहों की इस स्थिति के कारण कुंडली में राजयोग बनता है। 

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कुंडली (प्रतीकात्मक तस्वीर)
मकर लग्न के जातकों की कुंडली में जब शनि और बुध एक साथ भाग्य या कर्म भाव में मौजूद होते हैं तो कुंडली में राजयोग कारक बनता है। जिससे व्यक्ति के जीवन में किसी प्रकार की सुख-सुविधा में कोई कमी नहीं रहती है।

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कुंंडली (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कुंभ लग्न जातकों की कुंडली में जब शुक्र और शनि ग्रह भाग्य और कर्म भाव में उपस्थित होते हैं तो ऐसे लोगो का जीवन राजा के समान हो जाता है। 
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कुंडली (प्रतीकात्मक तस्वीर)
मीन लग्न के लोगों की कुंडली में जब गुरु और मंगल ग्रह नौवें और दसवें स्थान पर एक साथ उपस्थित होते हैं, तब ग्रहों की यह स्थिति राजयोग बनाती है। 
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