Astrology vs AI: आज एआई तेजी से और एडवांस होता जा रहा है, और बहुत से लोग अब एआई से अपनी ज्योतिष की जांच करा रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक एआई द्वारा की गई भविष्यवाणियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में ज्योतिषाचार्य से समझते हैं।
Can AI Predict Future?: तकनीक के इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई हमारे जीवन के हर क्षेत्र में तेजी से दखल दे रहा है। दफ्तर के काम से लेकर क्रिएटिव राइटिंग तक, एआई हर जगह अपनी उपयोगिता साबित कर रहा है। तकनीक के इसी विस्तार के बीच अब एक नया चलन शुरू हुआ है जिसमें लोग एआई से ज्योतिष और भविष्यफल पूछ रहे हैं। आज बहुत से लोग एआई टूल्स और एप्स के जरिए अपनी कुंडली दिखा रहे हैं और अपने आने वाले कल की भविष्यवाणियां जान रहे हैं।
कंप्यूटर स्क्रीन पर कुछ ही सेकेंड्स में भविष्य का लेखा-जोखा सामने आ जाता है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रहता है। मगर सवाल उठता है कि क्या कोडिंग और एल्गोरिदम पर काम करने वाली एक मशीन किसी इंसान की तकदीर का सही फैसला कर सकती है? क्या तकनीक वाकई ग्रहों की चाल और किस्मत के खेल को समझ सकती है? इसी बेहद दिलचस्प और गंभीर विषय पर हमने जाने-माने ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार द्विवेदी जी से खास बातचीत की।
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astrology
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ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार द्विवेदी जी के मुताबिक, इसमें कोई संदेह नहीं है कि आज के समय में एआई तकनीक बहुत तेजी से एडवांस और अपग्रेड हो रही है। यही वजह है कि आम लोगों के बीच डिजिटल ज्योतिष का क्रेज भी लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद, ज्योतिषाचार्य जी का स्पष्ट मानना है कि एआई द्वारा की गई भविष्यवाणियों पर आंख मूंदकर भरोसा बिल्कुल नहीं किया जा सकता है।
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एआई एस्ट्रोलॉजी
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ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार द्विवेदी के मुताबिक तकनीक चाहे कितनी भी एडवांस क्यों न हो जाए, वह कभी भी एक अनुभवी ज्योतिषाचार्य की जगह नहीं ले सकती। एआई कभी भी उस सटीकता के साथ भविष्यवाणी नहीं कर पाएगा, जैसी एक इंसान करता है। ज्योतिषाचार्य जी ने एआई की भविष्यवाणियों पर भरोसा न करने और इसकी सीमाओं को समझाने के लिए तीन बेहद प्रमुख और तार्किक कारण बताए हैं।
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Astrology and Health
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पहला कारण समझाते हुए उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र का उदाहरण दिया। उनका कहना है कि मेडिकल साइंस में आज एआई कितना भी एडवांस हो गया हो, लेकिन मरीज के सटीक इलाज और सर्जरी के लिए हमेशा एक डॉक्टर की जरूरत रहेगी। ठीक इसी तरह, ज्योतिष के क्षेत्र में भी चाहे कितनी भी बड़ी तकनीक आ जाए, एक योग्य ज्योतिषाचार्य की आवश्यकता हमेशा बनी रहेगी।
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उन्होंने बताया कि इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि एआई कभी भी पूरी तरह से इंसानी दिमाग की तरह काम नहीं कर सकता। ज्योतिष में हर जातक की कुंडली और उसकी परिस्थितियां बिल्कुल अलग होती हैं। ज्योतिषाचार्य हर जातक के व्यक्तिगत मामले, उसकी मनोदशा और समय चक्र को देखकर भविष्यवाणी करते हैं। कंप्यूटर प्रोग्राम या एआई कभी भी इन संवेदनशील इंसानी बारीकियों को गहराई से नहीं समझ सकता।
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एआई एस्ट्रोलॉजी
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दूसरा कारण बताते हुए ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार द्विवेदी जी कहते हैं कि एआई का अपना एक सीमित दायरा होता है। एआई पूरी तरह से सिर्फ उसी डेटा और एल्गोरिदम पर काम करता है, जो डेवलपर्स द्वारा उसमें फीड किया जाता है। वह अपने मन से या परिस्थितियों को भांपकर कोई नई बात नहीं सोच सकता है, क्योंकि उसके पास स्वतंत्र सोचने की क्षमता नहीं होती।
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ज्योतिष शास्त्र में दान का महत्व
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ऐसे में जब कोई व्यक्ति एआई से अपने भविष्य या किसी समस्या के बारे में पूछता है, तो सीमित जानकारी होने की वजह से वह पूरी और सटीक बातें नहीं बता पाता है। एआई केवल उपलब्ध डेटा को जोड़कर एक सामान्य अनुमान सामने रख देता है, जिसे हर व्यक्ति के जीवन पर हुबहू लागू नहीं किया जा सकता। इसलिए ज्योतिषीय गणना में यह तरीका फेल हो जाता है।
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ज्योतिषाचार्य (सांकेतिक तस्वीर)
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तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण अध्यात्म और आस्था से जुड़ा है। ज्योतिषाचार्य मनोज जी के मुताबिक, हर सच्चे ज्योतिषी पर उनके इष्ट देव की विशेष कृपा होती है। जब भी कोई ज्योतिषी किसी जातक की कुंडली देखता है, तो वह सबसे पहले अपने इष्ट देवता की पूजा-अर्चना करता है। वह भगवान से प्रार्थना करता है कि उनके मुख से निकलने वाले शब्द सच साबित हों और जातक का कल्याण हो।
इसके विपरीत अगर एआई की बात की जाए तो वह महज एक बेजान मशीन है। एआई के पास न तो कोई भावनाएं हैं और न ही उस पर किसी इष्ट देवता की कृपा या आशीर्वाद होता है। ज्योतिष सिर्फ गणित नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना भी है। यही वजह है कि बिना दैवीय कृपा और इंसानी समझ के एआई की भविष्यवाणियां कभी सटीक नहीं हो सकतीं।