फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pitru Paksha 2019: आज से पितरों को तर्पण, जानिए श्राद्ध के बारे में 15 जानकारियां

Sat, 14 Sep 2019 07:47 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क,अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 8
pitru paksha 2019
श्राद्ध की तिथियों में लोग अपने पितरों का उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध कर्म करते है और उन्हें जल देते हैं। शास्त्रों अनुसार पितरों का ऋण श्राद्ध द्वारा ही चुकाया जा सकता है। पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पितृगण प्रसन्न रहते हैं। श्राद्ध में पितरों को उम्मीद रहती है कि हमारे पुत्र-पौत्रादि पिंडदान और तिलांजलि प्रदान करेंगे। इसी आशा में वे इन तिथियों में पितृलोक से पृथ्वीलोक पर आते हैं। हिंदू धर्म शास्त्रों में पितृपक्ष में श्राद्ध अवश्य रूप से करने के लिए कहा गया है। आज हम आपको श्राद्ध से जुड़ी कुछ विशेष बातें बता रहे हैं।

इस पितृ पक्ष गया में कराएं श्राद्ध पूजा, पितरों के आशीर्वाद से चमकेगी किस्मत। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)
विज्ञापन

2 of 8
1. पिता का श्राद्ध पुत्र द्वारा ही होना चाहिए। पुत्र नहीं है तो पत्नी, अगर पत्नी भी नहीं है, तो सगा भाई श्राद्ध कर सकता है। एक से अधिक पुत्र होने पर सबसे बड़ा पुत्र श्राद्ध कर्म करता है।

2. ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद उन्हें पूरे सम्मान के साथ विदा करके आएं। मान्यता है कि ब्राह्मणों के साथ पितर भी चलते हैं। ब्राह्मण भोज के बाद अपने परिजनों को भोजन कराएं।

इस पितृ पक्ष गया में कराएं श्राद्ध पूजा, पितरों के आशीर्वाद से चमकेगी किस्मत। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)

 
विज्ञापन

3 of 8
3. श्राद्ध तिथि से पहले ही ब्राह्मणों को भोजन के लिए निमंत्रण दें। भोजन के लिए आए ब्राह्मणों को दक्षिण दिशा में बैठाएं।

4. मान्यता अनुसार पितरों को दूध, दही, घी और शहद के साथ अन्न से बनाए गए पकवान जैसे खीर आदि पसंद है। इसलिए ब्राह्मणों को ऐसा ही भोजन कराएं।

इस पितृ पक्ष गया में कराएं श्राद्ध पूजा, पितरों के आशीर्वाद से चमकेगी किस्मत। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)



 

4 of 8
5. भोजन में से गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी के लिए उनका भाग अलग से निकाल लेना चाहिए। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत, चन्दन, फूल और तिल लेकर संकल्प करें ।
6. कुत्ते और कौए के निमित्त निकाला हुआ भोजन उन्हें ही कराएं। देवता और चींटी का भोजन गाय को खिला देना चाहिए। ब्राह्मणों के मस्तक पर तिलक लगाकर उन्हें कपड़े, अन्न और दक्षिणा दान कर आशीर्वाद पाएं।

इस पितृ पक्ष गया में कराएं श्राद्ध पूजा, पितरों के आशीर्वाद से चमकेगी किस्मत। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)
विज्ञापन

5 of 8
7. श्राद्धकर्म में सिर्फ गाय का घी, दूध और दही का उपयोग करना चाहिए।
8. श्राद्धकर्म में चांदी के बर्तनों का उपयोग व दान पुण्यदायक माना गया है।

इस पितृ पक्ष गया में कराएं श्राद्ध पूजा, पितरों के आशीर्वाद से चमकेगी किस्मत। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)
 
विज्ञापन

6 of 8
9.   ब्राह्मण को भोजन मौन रहकर करना चाहिए। शास्त्रों अनुसार पितृ तब तक ही भोजन ग्रहण करते हैं जब तक ब्राह्मण मौन रहकर भोजन करें।
10. अगर पितृ शस्त्र आदि से मारे गए हों तो उनका श्राद्ध मुख्य तिथि के अलावा चतुर्दशी को भी करना चाहिए।

इस पितृ पक्ष गया में कराएं श्राद्ध पूजा, पितरों के आशीर्वाद से चमकेगी किस्मत। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)
विज्ञापन

7 of 8
 11. श्राद्धकर्म में ब्राह्मण भोज का महत्व बहुत अधिक है। जो व्यक्ति बिना ब्राह्मण के श्राद्धकर्म करते है, उनके घर में पितर भोजन नहीं करते है।
12.  दूसरे की भूमि पर श्राद्धकर्म नहीं किया जाता है । वन, पर्वत, पुण्यतीर्थ में श्राद्धकर्म किए जा सकते है।

इस पितृ पक्ष गया में कराएं श्राद्ध पूजा, पितरों के आशीर्वाद से चमकेगी किस्मत। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)


 
विज्ञापन

8 of 8
13. शुक्लपक्ष में, रात्रि में, अपने जन्मदिन पर और एक ही दिन में दो तिथियों का योग हो तो ऐसे में कभी श्राद्धकर्म नहीं करना चाहिए। धर्म ग्रंथों के अनुसार सायंकाल का समय सभी कार्यों के लिए निंदित है। शाम के समय भी श्राद्धकर्म नहीं करना चाहिए।
14. श्राद्धकर्म के लिए शुक्लपक्ष की अपेक्षा कृष्ण पक्ष में श्रेष्ठ माना गया है।
15. श्राद्ध में ये चीजें होना बहुत महत्वपूर्ण हैं- गंगाजल, दूध, शहद, कुश और तिल। केले के पत्ते पर श्राद्ध भोजन नहीं कराया जाता है । सोने, चांदी, कांसे, तांबे के बर्तन उत्तम हैं। इनके अभाव में पत्तल का उपयोग भी किया जा सकता है।

इस पितृ पक्ष गया में कराएं श्राद्ध पूजा, पितरों के आशीर्वाद से चमकेगी किस्मत। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें