13. शुक्लपक्ष में, रात्रि में, अपने जन्मदिन पर और एक ही दिन में दो तिथियों का योग हो तो ऐसे में कभी श्राद्धकर्म नहीं करना चाहिए। धर्म ग्रंथों के अनुसार सायंकाल का समय सभी कार्यों के लिए निंदित है। शाम के समय भी श्राद्धकर्म नहीं करना चाहिए।
14. श्राद्धकर्म के लिए शुक्लपक्ष की अपेक्षा कृष्ण पक्ष में श्रेष्ठ माना गया है।
15. श्राद्ध में ये चीजें होना बहुत महत्वपूर्ण हैं- गंगाजल, दूध, शहद, कुश और तिल। केले के पत्ते पर श्राद्ध भोजन नहीं कराया जाता है । सोने, चांदी, कांसे, तांबे के बर्तन उत्तम हैं। इनके अभाव में पत्तल का उपयोग भी किया जा सकता है।
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