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Rudraksh: मंगल दोष दूर करता है ग्यारह मुखी रुद्राक्ष, जानिए कैसे करें इसकी पहचान और कौन सी राशि वाले करें धारण

Sat, 04 Jun 2022 12:22 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मंगल दोष दूर करता है ग्यारह मुखी रुद्राक्ष - फोटो : iStock
Rudraksha Benefits: रुद्राक्ष का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। शास्त्रों में रुद्राक्ष को भगवान शिव का ही रूप माना जाता है। मान्यता है कि रुद्राक्ष को धारण करने वाले लोगों के जीवन से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। जो लोग रुद्राक्ष धारण करते हैं, उनके ऊपर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रुओं से हुई है। रुद्राक्ष धारण करने से धार्मिक ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य लाभ भी होता है। रुद्राक्ष कई प्रकार के होते हैं। इन सभी रुद्राक्ष की अपनी एक अलग महिमा होती है। रुद्राक्षों में ग्यारह मुखी रुद्राक्ष की भी अपनी महिमा है। महाशिवपुराण के अनुसार इस 11 मुखी रुद्राक्ष को अपनी शिखा, यानी बालों में बांधने से या गले में धारण करने से उच्च पद की प्राप्ति होती है। व्यक्ति राजा के समान सुख भोगता है। व्यक्ति का मन शुद्ध रहता है। चलिए आज जानते हैं ग्यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने के लाभ और  किन राशि वालों को यह रुद्राक्ष धारण करना चाहिए और इसकी पहचान क्या है। 
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मंगल दोष दूर करता है ग्यारह मुखी रुद्राक्ष - फोटो : iStock
ग्यारह मुखी रुद्राक्ष का महत्व 
रुद्राक्ष में एक अनोखे तरह का स्पंदन होता है, जो सुरक्षा कवच का काम करता है। इसीलिए जो भी व्यक्ति रुद्राक्ष धारण करता है, उसे यह निगेटिव ऊर्जा से बचाकर रखता है। हिन्दु धर्म में रुद्राक्ष के पेड़ और रुद्राक्ष के दाने दोनों का ही महत्व है। लगभग सभी हिंदू ग्रंथों में रुद्राक्ष का जिक्र देखने को मिलता है।  जन्मकुंडली में जब मंगल ग्रह खराब होते हैं तो व्यक्ति गुस्सैल और चिड़चिड़ा हो जाता है। साथ ही उसकी विवाह आदि में भी बाधा आने की संभावनाएं हैं। यदि आपके साथ भी ऐसा ही कुछ है तो इस समस्या से मुक्ति और सुखी वैवाहिक पाने के लिए 11 मुखी रूद्राक्ष मंगलवार के दिन सफेद धागे में गले में धारण करें। इस 11 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने वाले व्यक्ति के अंदर नेतृत्व गुणों का विकास होता है, यानी ये व्यक्ति को नेतृत्व की क्षमता प्रदान करता है।
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मंगल दोष दूर करता है ग्यारह मुखी रुद्राक्ष - फोटो : pinterst
11 मुखी रुद्राक्ष के लाभ 
11मुखी रुद्राक्ष हर प्रकार के संकट क्लेश,उलझन व समस्याओं को दूर करने में सक्षम है। इसके साथ ही पराक्रम,साहस और आत्मशक्ति को बढ़ाता है। घर में किसी भी प्रकार की बाधा हो जैसे भूत-प्रेत, देवी बाधा,शत्रु भय आदि हो तो आप ग्यारहमुखी रूद्राक्ष को अपने पूजा कक्ष में रखकर उसका नियमित पूजन करें तो शीघ्र ही लाभ मिलेगा। जिस स्त्री को सन्तान नहीं हो रही हैं उसे ग्यारहमुखी रूद्राक्ष को गले में धारण करने से चमत्कारी लाभ मिलता है।

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मंगल दोष दूर करता है ग्यारह मुखी रुद्राक्ष - फोटो : iStock
मिलता है मंगलदोष से छुटकारा 
मंगलवार के दिन ग्यारहमुखी रुद्राक्ष धरण करने से मंगल दोष से भी मुक्ति मिलती है। साथ ही ग्यारह मुखी रुद्राक्ष के दाने को सुमेरू के रूप में पांच मुखी रुद्राक्ष की माला में लगाकर धारण करना भी उत्तम बताया गया है। रुद्राक्ष को धारण करने के लिये लाल धागे का उपयोग करना चाहिए।
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मंगल दोष दूर करता है ग्यारह मुखी रुद्राक्ष - फोटो : अमर उजाला
11 मुखी रुद्राक्ष की पहचान
वैसे तो रुद्राक्ष कई प्रकार के होते हैं लेकिन असली और नकली रुद्राक्ष की पहचान करना काफी मुश्किल है। आइए जानते हैं आप 11 मुखी रुद्राक्ष की पहचान कैसे कर सकते हैं। 11 मुखी रुद्राक्ष में 11 धारियां होती हैं। ये धारियां स्पष्ट नजर आनी चाहिए। तब ही रुद्राक्ष को असली माना जाता है। वैसे सबसे अच्छा 11 मुखी रुद्राक्ष नेपाल का आता है। लेकिन इंडोनेशिया का भी रुद्राक्ष भी खरीदा जा सकता है। 
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rudraksh - फोटो : iStock
इस राशि के जातक 11 मुखी रुद्राक्ष धारण करें 
मीन राशि के जातकों के लिए ग्यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करना अतिशुभ माना जाता है। एकादशमुखी अथवा ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को हनुमानजी की कृपा प्राप्त है। एकादशमुखी रुद्राक्ष के धारक को हनुमान जी जैसे गुण प्राप्त होते है, जैसे बात करने की कुशलता, आत्मविश्वास, तेज बुद्धि , शारीरिक बल आदि। योग और तंत्र से जुड़े व्यक्तियों के लिए भी यह बहुत लाभकारी है। साथ ही यह रुद्राक्ष रक्षा प्रदान करता है। औषधि के रूप में यह दिव्य बीज पेट, हृदय, लिवर, संबंधी रोगों के उपचार में सहायक होगा।
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मंगल दोष दूर करता है ग्यारह मुखी रुद्राक्ष - फोटो : SELF
धारण विधि 
  • 11 मुखी रूद्राक्ष की अभिमंत्रण क्रिया केवल,सोमवार,शुक्रवार अथवा एकादशी के दिन ही करनी चाहिए। 
  • एक घी का दीपक जलाकर,उसको रोली रंगे हुए चावल पर रखे। उसके सामने रूद्राक्ष रख दे। 
  • तत्पश्चात रूद्राक्ष को गंगाजल व दूध से परिमार्जित करे। रूद्राक्ष पर रंगे हुये चावल छिड़कते हुये हनुमान जी का ध्यान करें। 
  • ध्यान के बाद मन्त्र 'ऊं हों हस्फ्रें हसों हस्ख्फे्र हसौ हनुमते नमः' को पढ़ते हुए चन्दन, विल्बपत्र गन्ध, इत्र दूध व दीप से पूजन करें। 
  • पूजन के बाद उपरोक्त मन्त्र से 11 बार जाप करके हवन करे। तत्पश्चात हवन-अग्नि की 11 बार परिक्रमा करके रूद्राक्ष को गले में धारण करे।
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