कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 में कुश्ती में स्वर्ण पदक जीतने वाले सुशील कुमार ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन बेहद जरूरी है।
महिलाओं के लिए कुश्ती में बेहतर स्कोप
उन्होंने कहा कि कुश्ती में खिलाड़ियों का अच्छा भविष्य है। महिलाओं के लिए भी इसमें बेहतर स्कोप है। सुशील गुरुवार शाम को झड़ीपानी स्थित ओकग्रोव स्कूल में बच्चों से इंटरेक्टिव सेशन के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि काफी सालों तक एशियन, कॉमनवेल्थ और ओलंपिक गेम्स में भारतीय खिलाड़ी मेडल नहीं जीत पाते थे। लेकिन आज सभी खेलों में बेहतर भविष्य नजर आता है।
पिता को कैंसर होने को उन्होंने जीवन की सबसे दुखद घटना बताया। उन्होंने कहा कि ओलंपिक में रजत और कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर उन्हें सबसे ज्यादा खुशी हुई।
सुशील कुमार ने कहा कि खेलों में अंधविश्वास नहीं मेहनत काम आती है। एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वह एक बार भारत का झंडा लेकर सबसे आगे चल रहे थे, तभी एक पत्रकार ने पूछा कि जब भी कोई झंडा लेकर आगे चलता है वह मेडल नहीं जीतता।
लेकिन उन्होंने इस मिथ्य को तोड़ा और मेहनत की बदौलत मेडल जीता। सुशील ने स्कूली बच्चों को टिप्स भी दिए। इस मौके पर स्कूल के प्रिंसिपल संदीप त्रिवेदी, इला त्रिवेदी, योगेंद्र सिंह चौहान, अतुल कुमार सक्सेना, सुशील कुमार के कोच राजकुमार, प्रवेश, राकेश, पवन, धर्मेंद्र आदि मौजूद थे। संचालन विपिन कुमार ने किया।