हॉकी इंडिया की अनुशासनात्मक समिति ने मंगलवार को कुछ खिलाड़ियों, कोच और अधिकारियों पर आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए प्रतिबंध लगा दिया।
समिति के सदस्यों के समक्ष खिलाड़ियों और कोच की सुनवाई के बाद तथ्यों पर विचार करने के बाद यह प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध खिलाड़ियों पर एक अप्रैल से लागू है।
बहरहाल, हॉकी इंडिया ने सभी खिलाड़ियों और अधिकारियों को 30 दिन के भीतर प्रतिबंध के खिलाफ अपील दायर करने की छूट दी है।
खिलाड़ी, कोच और अंपायरों में हुई गालीगलौज
यह प्रतिबंध उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी देवेश चौहान, अंपायर सांगा, अनुपमा पुचिमांदा, मध्य प्रदेश एकेडमी के कोच परमजीत सिंह और टीम मैनेजर ऊषा निंबालकर समेत टीम के 18 सदस्यों पर लगाया गया है।
मामला यहां चौथे हॉकी इंडिया सीनियर मेन नेशनल चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश और एयर इंडिया के बीच मैच के दौरान खिलाड़ियों, कोच और अंपायरों के बीच कहासुनी का है।
इस मैच में उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी देवेश चौहान द्वारा बार-बार फाउल की अपील किए जाने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय अंपायर सांगा अपना आपा खो बैठे और खिलाड़ियों के साथ गालीगलौज की।
गलत आरोप लगाने पर लगा 3 महीने का बैन
देवेश चौहान ने इसकी शिकायत टूर्नामेंट डायरेक्टर आरवी शेलार से की। हालांकि शेलार ने इस तरह की किसी भी घटना से इनकार किया है।
लेकिन उन्होंने चौहान पर सुरजीत हॉकी टूर्नामेंट के दौरान इस तरह की घटना करने का कथित तौर पर आरोप लगाया।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान चौहान और शेलार दोनों समिति के समक्ष पेश नहीं हुए। लिहाजा समिति ने यह कहते हुए दोनों पर अगले तीन महीने के लिए प्रतिबंध लगा दिया कि दोनों ने एक-दूसरे पर गलत आरोप लगाए।
रंगीन टी-शर्ट नहीं पहनने पर लगा बैन
एक अन्य मामले में समिति ने अंपायर अनुपमा पुचिमांदा पर दो महीने का प्रतिबंध लगा दिया।
अनुपमा पर चौथे वुमन नेशनल चैंपियनशिप में सेमीफाइनल मुकाबले के दौरान रंगीन टी-शर्ट नहीं पहनने का आरोप है। साथ ही उन्होंने इस मामले पर अपने सह अंपायर से कहासुनी भी की।
वहीं, मध्य प्रदेश हॉकी एकेडमी टीम के सभी 18 सदस्यों को एक महीने के लिए प्रतिबंधित किया गया है। उन पर भोपाल में चौथे हॉकी इंडिया सीनियर वुमन नेशनल चैंपियन में मैच के दौरान 40-50 सेकंड तक मैदान पर टहलने का आरोप है। साथ ही कोच परमजीत सिंह और उनके साथी टीम मैनेजर ऊषा निंबालकर पर भी दो महीने का प्रतिबंध लगाया गया है।