5 मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होने में एक हफ्ते से भी कम का समय रह गया है। तीन दशक के बाद पहली बार इतनी बड़ी सीरीज खेलने से पहले महेंद्र सिंह धोनी की टीम दबाव महसूस कर रही थी।
ऐसा हो भी क्यों न, आज से दो साल पहले टीम इंडिया जब इंग्लैंड आई थी तो उस दौरे में उसे 4 मैचों की टेस्ट सीरीज में 4-0 से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वनडे सीरीज और ट्वंटी-20 में भी हार का मुंह देखना था।
इंग्लैंड में मिली करारी हार से सबक लेते हुए कप्तान धोनी ने इस बार पूरी तैयारी के साथ टेस्ट सीरीज में उतरना चाहते हैं। धोनी की इस कोशिश को उस समय बड़ी सफलता मिली जब उनकी टीम ने तीन दिवसीय दूसरे अभ्यास मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए विपक्षी टीम को हरा दिया।
पहली पारी में भारत को मिली 15 रनों की बढ़त
टेस्ट सीरीज से पहले भारत को इंग्लैंड में दो 3 दिवसीय अभ्यास मैच खेलने थे, लेकिन पहला अभ्यास मैच बारिश के कारण पूरा नहीं खेला जा सका और मैच ड्रॉ पर खत्म हो गया।
लेकिन डर्बीशायर के खिलाफ खेले गए दूसरे अभ्यास मैच में बारिश ने कोई बाधा नहीं डाली और पूरा मैच खेला गया। भारत ने यह मैच खेल खत्म होने से 9 ओवर पहले ही 5 विकेट से जीत लिया।
डर्बीशायर के पहली पारी में बनाए 326 रन के जवाब में भारत ने पहली पारी 6 विकेट पर 341 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित कर दी। भारत ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक जो स्कोर बनाया था उसे तीसरे दिन की सुबह एक भी गेंद खेले बगैर ही घोषित कर दी। इस आधार पर भारत को 15 रनों की बढ़त मिली।
दोनों ही पारियों में नाकाम रहे धवन
तीसरे दिन डर्बीशायर की टीम जब दूसरी पारी शुरू करने मैदान पर उतरी तो उसे जल्द ही झटका लग गया। अभी टीम के स्कोर में एक भी रन नहीं जुड़ा था कि तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने पहला विकेट झटक लिया।
इसके बाद डर्बीशायर ने आराम से खेलते हुए 45 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 156 रन बनाए। मेजबान टीम ने अपनी पारी यहीं पर घोषित कर दी।
इस आधार पर भारत को 45 ओवर में 141 रन बनाने का लक्ष्य मिला। भारत को पहली पारी में 15 रनों की बढ़त भी थी। अब सबकी नजर शिखर धवन और मुरली विजय पर थी जो पहली पारी में नहीं चल सके थे और 6-6 रन बनाकर आउट हो गए थे। लेकिन धवन इस पारी में भी नाकाम रहे और 9 रन बनाकर आउट हो गए।
जीत से बढ़ा भारत का मनोबल
भारत को टेस्ट सीरीज से पहले मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने के लिए इस मैच में जीत हासिल करना जरूरी था, अब धवन की नाकामी के बाद दबाव मुरली विजय (41) और अजिंक्य रहाणे (39) पर आ गया। हालांकि दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 14 ओवर में 63 रनों की साझेदारी कर टीम को जीत की आस दिला दी।
विजय ने तकरीबन हर ओवर में चौका जमाया। टीम को अच्छी स्थिति में पहुंचाने के बाद दोनों बल्लेबाजों ने अन्य बल्लेबाजों को मौका देने के लिए रिटायर्ड हर्ट ले लिया और पवेलियन लौट गए।
लेकिन दोनों की जगह क्रीज पर आए रोहित शर्मा (10) और रिदिमान साहा (19) दोनों ही इस मौके का फायदा नहीं उठा सके और सस्ते में आउट हो गए। भारत की जीत की औपचारिकता गौतम गंभीर (21) और रवींद्र जडेजा (0) ने पूरी कर दी। भारत ने यह मैच 5 विकेट से जीत लिया।