शिष्य नाम कमाए तो अब उसके गुरु को भी पूरा मान मिलेगा। उत्तराखंड कैबिनेट मंजूरी का इंतजार कर रही खेल नीति में खेल प्रशिक्षकों को भी नकद पुरस्कार दिए जाने की व्यवस्था की गई है।
प्रशिक्षक को स्वयं करना होगा आवेदन
खिलाड़ी के राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक के अनुरूप प्रशिक्षकों के लिए अलग-अलग पुरस्कार राशि तय की गई है। खास बात यह है कि किसी खिलाड़ी के व्यक्तिगत प्रदर्शन के साथ टीम इवेंट में भी यह व्यवस्था लागू होगी। हालांकि, पुरस्कार के लिए प्रशिक्षक को आवेदन स्वयं करना होगा।
इसके लिए प्रशिक्षक का खिलाड़ी या टीम के साथ नियमित तौर पर 240 दिन या अधिक समय तक प्रशिक्षण देना अनिवार्य है। एक से अधिक प्रशिक्षक होने पर प्रोत्साहन राशि बराबर बांटी जाएगी।
ये हैं प्रस्तावित पुरस्कार (रु. में, संभावित)
ओलंपिक खेल
स्वर्ण-5 लाख
रजत-3 लाख
कांस्य-2 लाख
एशियन/एफ्रो एशियन/विश्व चैंपियनशिप खेल
स्वर्ण-3 लाख
रजत-2लाख
कांस्य-1 लाख
राष्ट्रमंडल खेल/सैफ खेल
स्वर्ण-2 लाख
रजत-1.50 लाख
कांस्य-50 हजार
राष्ट्रीय खेल/राष्ट्रीय चैंपियनशिप
स्वर्ण-20 हजार
रजत-15 हजार
कांस्य-10 हजार
भूतपूर्व खिलाड़ियों को मिलेगी पेंशन
खेल नीति में 50 साल की उम्र पार कर चुके राज्य के भूतपूर्व खिलाड़ियों को प्रतिमाह आर्थिक सहायता का प्रस्ताव भी है। इसे दो वर्गों में बांटा गया है। आर्थिक सहायता राज्य के ऐसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को मिलेगी जो कहीं नौकरी नहीं कर रहे हों या जिनके पास आय के साधन नहीं हैं।
ये होंगे हकदार (पेंशन प्रस्तावित)
7500 रुपए प्रतिमाह: ओलंपिक, विश्व कप में पदक जीतने या प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ी
6500 रुपए प्रतिमाह: एशियाड, कॉमनवेल्थ, एफ्रो एशियन, सैफ गेम्स में पदक जीतने या प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ी