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ऐसा जीवनदान जिसकी उम्मीद बल्लेबाज को भी नहीं थी!

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रिदिमाना साहा और मनन वोहरा जब किंग्स इलेवन के लिए ताबड़तोड़ अंदाज में रन बटोर रहे थे तब किसी को यह आभास भी नहीं रहा होगा कि इन दोनों युवा बल्लेबाजों की मेहनत जाया हो जाएगी।
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आईपीएल 7 का फाइनल मैच बंगलूरू में खेला गया लेकिन इस खिताबी जंग में मेजबान टीम नहीं थी। बावजूद इसके स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था।

स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के लिए यह मैच पूरी तरह से पैसा वसूल साबित हुआ। इस मैच में कुल 399 रन बने। मैच में कई बार उतार-चढ़ाव भी दिखा, लेकिन खिताब शाहरुख खान की टीम ही जीतने में सफल रही। इस बेहद शानदार मैच में भी कई दिलचस्प बातें हुई।

टी-20 इतिहास में सबसे बड़ा फाइनल मैच

किंग्स इलेवन पंजाब की टीम रिदिमान साहा के धुआंधार शतकीय पारी के दम पर 20 ओवर में 199 रन बनाने में कामयाब रही। साहा के अलावा पंजाब के लिए मनन वोहरा ने भी 67 रनों की पारी खेली।

लेकिन कोलकाता नाइटराइडर्स ने 200 रनों का लक्ष्य हासिल करने के साथ ही न सिर्फ दूसरी बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया, बल्कि एक रिकॉर्ड भी बना दिया। और यह रिकॉर्ड है दुनिया में किसी भी टी-20 टूर्नामेंट के फाइनल मैच में 200 रनों के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल करने का।

इससे पहले श्रीलंका में अंतरराज्यीय टी-20 टूर्नामेंट के 2011 सत्र के फाइनल में वायम्बा ने रुहाना के खिलाफ 198 रन बनाए थे। हालांकि यह मैच टाई हो गया था लेकिन बाद में सुपर ओवर में वायम्बा ने बाजी मार ली। जबकि आईपीएल में चेन्‍नई ने 2012 के फाइनल में कोलकाता ने ही चेन्‍नई सुपर किंग्स के खिलाफ 192 रन बनाए थे।

टी-20 फाइनल में साहा ने खेली सबसे बड़ी पारी

विकेटकीपर-बल्‍लेबाज रिदिमान साहा अपनी आतिशी पारी खेलकर एक दिलचस्प रिकॉर्ड बना ही दिया। वह किसी भी टी-20 टूर्नामेंट के फाइनल में सर्वाधिक व्यक्तिगत (नाबाद 115) स्कोर बनाने वाले दुनिया के पहले बल्‍लेबाज बन गए हैं।

साथ ही वह फाइनल में शतक लगाने वाले दुनिया के दूसरे बल्‍लेबाज भी हो गए हैं। इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई टी-20 टूर्नामेंट के 2005-06 के सत्र में ब्रैड हॉज ने विक्टोरिया के लिए खेलते हुए न्यूसाउथ वेल्स के खिलाफ 106 रनों की पारी खेली थी।

जहां तक आईपीएल की बात है तो फाइनल में साहा से पहले मुरली विजय ने चेन्‍नई सुपर किंग्स के लिए 2011 में रॉयल चैलेंजर्स बंगलोर के खिलाफ 95 रन बनाए थे।

नारायन का सबसे खराब प्रदर्शन पर टीम बनी चैंपियन

करिश्माई गेंदबाज सुनील नारायन बेहद चतुर गेंदबाज माने जाते हैं। लेकिन पंजाब के रिदिमान साहा और मनन वोहरा ने फाइनल मैच में उनकी जमकर क्लास ली और चार ओवर के स्पेल में 46 रन कूट लिए। यह उनका टी-20 करियर में सबसे खराब प्रदर्शन है।

उनके शानदार करियर में ऐसा तीसरी बार हुआ है जब उन्होंने एक पारी में 46 रन लुटाए हों। पहली बार नारायन ने पिछले साल कैरेबियाई प्रीमियर लीग में बारबाडोस के खिलाफ 3.4 ओवर में 46 रन दिए थे।

इसके अलावा न्यूजीलैंड के खिलाफ इस साल की शुरुआत में ऑकलैंड में खेले गए एक ट्वंटी-20 मैच में 46 रन दिए थे। न्यूजीलैंड ने 189 रन बनाए और यह मैच आसानी से जीत लिया। नारायन के सबसे खराब प्रदर्शन के बावजूद टीम मैच जीतने में सफल रही।
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ऐसे जीवनदान की उम्मीद ही नहीं थी

रि‌दिमान साहा जब बल्‍लेबाजी करने क्रीज पर आए तो पंजाब टीम संकट में थी और 30 रन पर 2 बड़े विकेट गिर चुके थे। साहा ने मनन वोहरा के साथ संभल कर खेलते हुए पारी को आगे बढ़ाया।

पंजाब की पारी का 16वां ओवर टीम के लिए बेहद रोमांचक रहा। सुनील नारायन के इस ओवर की पहली गेंद पर साहा को नारायन ने ही जीवनदान दे दिया। इसके बाद अगली गेंद पर वोहरा स्टंप आउट हो गए, लेकिन मैदान से जाने के बाद उन्हें फिर से बल्‍लेबाजी के लिए आना पड़ा। उन्हें ऐसा जीवनदान मिला जिसकी उम्मीद दुनिया के किसी भी क्रिकेटर ने नहीं सोची रही होगी।

इस गेंद को आगे बढ़कर खेलने के प्रयास में वोहरा चूक गए और विकेटकीपर रॉबिन उथप्पा ने स्टंप कर दिया लेकिन टीवी रिप्ले में दिख रहा था कि उथप्पा ने विकेट के पीछे गेंद जाने से पहले ही गेंद को लपककर स्टंप कर दिया है। लंबे समय तक थर्ड अंपायर ने रिप्ले देखने के बाद न सिर्फ बल्‍लेबाज को नॉटआउट करार दिया बल्कि इस गेंद को नो बॉल भी कर दिया।
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