इंचियोन में एशियन गेम्स शुरू होने से पहले भारतीय दल में कोई विवाद न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। हर बार की तरह इस बार भी गेम्स शुरू होने से पहले काफी कुछ तय किया जाना बाकी है। गेम्स शुरू होने में कुछ ही दिन रह गए हैं।
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प्रधानमंत्री कार्यालय की सलाह के बाद खेल मंत्रालय ने एशियन गेम्स में जाने वाले टीमों के अधिकारियों की छंटनी के बाद भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) मुश्किल में आ गया है। आईओए ने मंत्रालय से गुहार लगाई है कि टीमों के काटे गए मैनेजरों को बहाल किया जाए। उनके बिना टीमों को इंचियोन में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
दूसरी ओर, लिएंडर पेस, सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना ने पेशेवर करियर को वरीयता देते हुए एशियन गेम्स ने नाम वापस ले लिया लेकिन इनके पिता और मां अधिकारी के रूप में जा रहे हैं।
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दिग्गजों ने दी पेशेवर करियर को वरीयता
भारत के शीर्ष टेनिस खिलाड़ियों ने आगामी एशियन गेम्स से अपना नाम वापस ले लिया है। भले ही खिलाड़ियों के इस फैसले के बाद उनकी राष्ट्र भावना पर सवाल उठने लगे हों लेकिन खिलाड़ियों ने इस फैसले के पीछे अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का हवाला दिया है।
एशियन गेम्स के दौरान कई एटीपी और डब्लूटीए टूर्नामेंट का कार्यक्रम टकराने के चलते सबसे पहले देश के नंबर वन खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन ने अपना नाम वापस लिया था। बाद में दिग्गज लिएंडर पेस और रोहन बोपन्ना ने भी बुधवार को अपना नाम वापस ले लिया।
सानिया मिर्जा को भी ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (एआईटीए) ने एशियन गेम्स से बाहर रहने की अनुमति दे दी है। सानिया ने हाल ही में यूएस ओपन में मिक्स्ड डबल्स का खिताब जीता था।
पेस और बोपन्ना के अपने-अपने तर्क
एशियन गेम्स में नहीं खेलने के अपने फैसले को लिएंडर पेस और रोहन बोपन्ना ने सही ठहराया है।
41 वर्षीय पेस ने कहा, "टेनिस ही मेरे लिए सब कुछ है। दो दिन पहले मेरी रैंकिंग गिरकर 35वें पर पहुंच गई है। मुझे यह भी सुनिश्चित करना है कि अगले साल खेलूं। इस साल अभी कुआलालंपुर और टोक्यो में खेलना है जिसका कार्यक्रम एशियन गेम्स से टकरा रहा है। हालांकि मेरे लिए देश हमेशा सर्वोपरि रहा है। अगर ऐसा नहीं होता तो मैं 24 साल से नहीं खेल रहा होता। मैंने हमेशा अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया है। करियर के लिहाज से मुझे कुआलालंपुर और टोक्यो को प्राथमिकता देना पड़ रहा है।"
बोपन्ना ने भी पेस से सहमति जताते हुए कहा कि उनके लिए यह फैसला कर पाना आसान नहीं था। बकौल बोपन्ना, "हम एशियाई खिलाड़ी इसमें खेलने के लिए बेताब रहते हैं। जैसा कि ली ने कहा, यह साल हमारे लिए आसान नहीं रहा। मैंने पिछले साल टोक्यो में जीता था इसलिए इस बार यह खिताब बरकरार रखना चाहता हूं। लिहाजा मुझे एशियन गेम्स से हटने का फैसला करना पड़ा।"
... पर जा रहे हैं पेस के पापा और सानिया की मां
एक ओर जहां लिएंडर पेस और सानिया मिर्जा जैसे बड़े टेनिस सितारे एशियन गेम्स से हट चुके हैं वहीं पेस के पिता और सानिया की मां बतौर मैनेजर वहां जा रहे हैं।
खेल मंत्रालय ने एशियाई खेलों के लिए जाने वाली टीमों के कई मैनेजरों की तो छुट्टी कर दी, लेकिन टेनिस के साथ सानिया मिर्जा की मां नसीमा मिर्जा का नाम बतौर मैनेजर जोड़े रखा।
खेल मंत्रालय को यह बात नागवार गुजरी कि जब पेस और सानिया मिर्जा एशियन गेम्स में नहीं खेल रहे हैं तो उनके पिता और मां के जाने का क्या तुक है। मंत्रालय ने मन बना लिया है कि जब सानिया और पेस इंचियोन में होंगे ही नहीं तो उनकी मां नसीमा मिर्जा और पेस के पिता डॉ. वेस पेस के टीम के साथ जाने का कोई औचित्य नहीं है।
हालांकि अभी तक मंत्रालय के पास तीनों (पेस, सानिया और रोहन बोपन्ना) के इंचियोन नहीं जाने की आधिकारिक सूचना नहीं पहुंची है। आईओए से यह सूचना पहुंचते ही इन दोनों के नाम दल से काटे जा सकते हैं। नसीमा टेनिस टीम की मैनेजर जबकि वेस पेस टीम के डॉक्टर रूप में जा रहे हैं।
मंत्रालय के एक उच्चाधिकारी के अनुसार टेनिस संघ या आईओए से उन्हें आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है कि ये तीनों टेनिस स्टार इंचियोन नहीं जा रहे हैं। ये नहीं जा रहे हैं तो टेनिस के साथ जाने वाले 6 ऑफिशियल्स का दल भी छोटा होना चाहिए। जैसे ही तीनों के नहीं खेलने की आधिकारिक सूचना मिलेगी। वह डॉ. वेस पेस और नसीमा मिर्जा का नाम दल से हटाने की सिफारिश करेंगे।
एशियन गेम्स की बैडमिंटन स्पर्धा में भारत की पदक की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। दिग्गज डबल्स महिला खिलाड़ी ज्वाला गट्टा ने दाएं घुटने की चोट के चलते अपना नाम वापस ले लिया है।
ज्वाला ने कहा कि विश्व चैंपियनशिप के बाद जब मैंने एशियन गेम्स की तैयारियां शुरू कीं, तभी से मुझे दर्द का अहसास होने लगा था। हालांकि यह तब उतना तेज नहीं था। मगर मंगलवार को मेरे घुटने में खिंचाव हुआ, जिसके बाद दर्द असहनीय हो गया। घुटने में सूजन भी आ गई, जिसके बाद मैंने दो डॉक्टरों से बात की, जिन्होंने दो हफ्ते के आराम की सलाह दी।