खेल नीति लागू होने के बाद उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले जाने वाले 41 खेलों के आयोजन भी शुरू हो जाएंगे। 32 ओलंपिक और नौ गैर ओलंपिक खेल प्रारंभ करने का प्रस्ताव नीति में रखा गया है। खेलों के विकास के लिए पांच से दस साल का वक्त तय किया गया है।
उत्तराखंड में अभी यूं तो फुटबॉल, बॉक्सिंग, वालीबॉल, शूटिंग और बैडमिंटन में कई खिलाड़ी हुनर दिखा रहे हैं। लेकिन खेल नीति में सेलिंग, याचिंग, पेंथालन, ट्रांपोलिन, ट्राईथलॉन, वुशू आदि खेलों को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
अगले पांच साल में राज्य के खिलाड़ियों की राष्ट्रीय खेलों, ओलंपिक, एफ्रो एशियन, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, विशिष्ट खेलों पर आधारित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है।
राष्ट्रीय स्तर पर एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, फुटबॉल, बैडमिंटन, निशानेबाजी, वालीबॉल, कुश्ती, जूडो और हॉकी में अगले पांच साल में उच्चतम स्थान प्राप्त करने का लक्ष्य बनाया गया है।
जबकि कबड्डी, तैराकी, ताइक्वांडो, कराटे, टेबल टेनिस, लॉन टेनिस, हैंडबाल, बास्केटबाल, भारोत्तोलन में राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष में आने के लिए 10 साल का समय नीति में रखा गया है। खेल नीति में क्षेत्र विशेष के अनुसार लोकप्रिय खेलों का खेल पॉकेट बनाने की योजना है।
साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में खो-खो, कबड्डी, वालीबॉल, एथलेटिक्स, हैंडबॉल, कुश्ती आदि कम खर्चीले खेलों को प्रोत्साहित करने के साथ ही स्थानीय स्कूल के प्रधानाचार्य, शिक्षक, व्यायाम शिक्षक, ग्राम सरपंच आदि की देखरेख में आयोजित कराने का प्रस्ताव है।