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खेलने की जगह तक नहीं है इस ओलंपियन के गांव में

Sun, 04 May 2014 12:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, राजौंद
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देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके बॉक्सर मनोज का पैतृक कस्बा राजौंद स्टेडियम के लिए तरस रहा है। यहां खिलाड़ियों के पास स्टेडियम की सुविधा तो दूर खेलने के लिए खाली जगह तक नहीं है। जिस कारण बच्चों में निराशा व्याप्त है।
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खिलाड़ी दीपक कुमार, राजेश, सुनील, संजय, प्रिंस शर्मा, कमलकांत, शुभम, सौरभ, कन्नू, हरजीत सिंह सहित अन्य ने बताया कि उनके गांव में खेलने के लिए खाली जगह तक नहीं है। यहां बच्चों को गलियों एवं कूचों में ही खेलना पड़ता है। अच्छी प्रतिभाएं होने के बावजूद खेल सुविधाओं के अभाव में बच्चों को मनमसोस कर रहना पड़ता है।

खेतों में बनाए गए अस्थाई मैदान में भी उन्हें कुछ दिन खेलना ही नसीब हो पाता है। क्योंकि खाली खेतों में कुछ दिन बाद बिजाई कर दी जाती है, जिससे उनसे वह मैदान भी छिन जाते हैं।
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इसके बाद खिलाड़ियों को गांव की सड़कों व गलियों में खेलना पड़ता है। इन खिलाड़ियों ने यह भी बताया कि खेल के मैदान के अभाव में गांव की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिलता, जिससे कई प्रतिभाएं दबकर रह जाती हैं।

आठ से दस किलोमीटर दूर है स्टेडियम
राहुल छाबड़ा, पवन मितल, मनोज शर्मा, जोगिंद्र सिंह, सोनू शर्मा, मोन शर्मा, दीपक इत्यादि ने बताया कि अगर नगर में एक अच्छा खेल स्टेडियम बनाकर उसमें एक कोच की नियुक्ति की जाए तो कस्बा से कई होनहार खिलाड़ी प्रदेश व देश व विदेश तक अपनी बहादुरी के परचम लहरा सकते हैं।

इन खिलाड़ियों ने मांग की कि कस्बा में एक खेल स्टेडियम अवश्य बनाया जाए, ताकि गांव के होनहार खिलाड़ी अपने अंदर छुपी प्रतिभा को निखार सकें। यहां 10 किलोमीटर दूर स्थित गांव भाणा एवं आठ किलोमीटर दूर स्थित रोहेड़ा गांव में स्टेडियम हैं। लेकिन ब्लॉक मुख्यालय में स्टेडियम नहीं है।

कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट हैं मनोज
कॉमनवैल्थ गेम्स में गोल्ड मेडलिस्ट एवं ओलंपियन मनोज कुमार राजौंद गांव से ही हैं। उन्होंने दिल्ली में वर्ष 2010 हुए कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा भी कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में वे अपना परचम लहरा चुके हैं।

लोगों की मांग है कि इस क्षेत्र से पैदा हुए मनोज ने देश-विदेश में राजौंद का नाम रोशन किया है। यहां एक अदद स्टेडियम खिलाड़ियों को मुहैया करवाया जाए, ताकि ओर प्रतिभाएं सामने आ सकें।

जगह मिले तो बन सकता है स्टेडियम
सरकार की नीति अनुसार प्रत्येक ब्लॉक में एक स्टेडियम बनाया गया है। राजौंद ब्लॉक का स्टेडियम गांव भाणा में बना हुआ है। यदि गांव में मांग है तो मिनी स्टेडियम बनाया जा सकता है। इसके लिए नगर पालिका या ग्राम पंचायत को चार एकड़ जमीन देनी होगी। इस बारे में प्रपोजल बनाकर विभाग को दिया जाए। इसका केस बनाकर खेल विभाग को भेज दिया जाएगा। स्वीकृत होने पर 20 लाख रुपये की लागत से स्टेडियम बना दिया जाएगा।
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-यशवीर गोयत, जिला खेल अधिकारी 
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