सात वर्ष की उम्र में जिस बच्चे ने देश के नामी रेसलर सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त को अपनी प्रतिभा का कायल कर दिया हो वो किसी करिश्मे से कम नहीं।
हम बात कर रहे हैं सिटी ब्यूटीफुल के गुरु नीलकंठ की। उसे देश का सबसे कम्र उम्र का रेसलर होने का खिताब मिल चुका है। इतनी छोटी उम्र में अपनी डील ढोल के चलते छोटे भीम के नाम से पहचाने जाते है गुरु नीलकंठ।
सॉपिंस स्कूल में कक्षा तीन का छात्र है और दो बार यंगस्टर्स रेसलर का खिताब अपने नाम कर चुका है। नीलकंठ को स्पोर्ट्स विरासत में मिला है। उनके पिता नीलकंठ ध्यानेश्वर स्वयं नेशनल लेवल के रेसलर रह चके हैं। वहीं उनकी मां नेशनल लेवल की शूटिंग की खिलाड़ी रह चुकी हैं। दादा ध्यानेश्वर भी बॉक्सर रह चुके हैं।
बेटे को बड़ा रेसलर बनाना
पिता नीलकंठ नेशनल लेवल तक ही रेसलिंग कर पाए। लेकिन, अब पिता ने ठान लिया है कि वह गुरु को अंतरराष्ट्रीय लेवल का रेसलर बनाएंगे। इस लिए इतनी छोटी उम्र में ही बेटे को रेसलिंग में डाल दिया।
सबसे कम उम्र का रेसलर होने का गर्व
गुरु ने महज तीन साल की उम्र से पहलवानी में हाथ अजमाने शुरू कर दिया है। साथ ही देश का सबसे कम उम्र का पहलवान होने का खिताब हासिल किया। चंडीगढ़ में हुई प्रतियोगिताआें में अपने से दोगुनी उम्र के पहलवानाें का पस्त कर रहा है।
अखाड़े में करता है अभ्यास
लेक स्थित कपीश्वर अखाड़े में गुरु रोजाना पहलवानी का अभ्यास करता है। यहां वह रोजाना दो घंटे से अधिक पहलवानी के दांव पेच सीखता है। वहीं पिता भी नीलकंठ इसमें पूरी रूचि रखते हैं। वह अपने बेटे को बड़ा पहलवान बनाने के लिए उसकी डाईट का पूरा ख्याल रखते हैं। वह उसे तला हुआ और जंक फूड नहीं खाने देते।
लंबी है चाहने वालों की लिस्ट
इस नन्हें पहलवान के चाहने वालाें की लिस्ट काफी लंबी है। चंडीगढ़ कुश्ती प्रतियोगिता में आए सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त भी उसकी प्रतिभा देख प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाए। उन्हाेंने उसे कई टिप्स भी दिए। वहीं फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह भी इसके मुरीद हैं। वह गुरु को अपने घर बुलाकर उसकी पीठ थपथपा चुके हैं।
उपलब्धियां
- 2010 में शहर में आयोजित नेशनल कुश्ती चैंपियनिशप में सबसे कम उम्र के पहलवान बने और गोल्ड मेडल हासिल किया।
- 2010 में नासिक में यंगस्टर पहलवान के खिताब से नवाजे गए।