ट्राइसिटी में ऐसे कई खिलाड़ी हैं जिन्होंने देश में ही नही विदेशों में भी स्केटिंग में अपनी काबिलियत साबित की है। सिटी ब्यूटीफल और इसके आसपास स्केटिंग के लिए बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर है। कई स्कूलों में शानदार रिंग बने हैं जहां रोजाना कई युवा अभ्यास में जुटे हुए दिखाई देते हैं।
दो तरह के स्केटिंग रिंग-
पहला स्पीड स्केटिंग ट्रैक 200 मीटर का होता है। इसमें 300 मीटर, 500 मीटर, 500 मीटर की रेसों का आयोजन किया जाता है।
दूसरा रोलर हॉकी रिंक। इसमें रोलर हॉकी के मुकाबलों का अयोजन किया जाता है।
ये हैं स्केटिंग के रूल्स
स्केटिंग रेस के दौरान सभी खिलाड़ियों की टाइमिंग चेक होती है। इनमें सबसे बेस्ट टाइमिंग निकालने वाले को विजेता घोषित किया जाता है। वहीं रोलर हॉकी के लिए हर टीम में 10 खिलाड़ी होते हैं। इसमें 5 प्लेइंग होते हैं। मैच 45 मिनट का होता है। इसमें 5 मिनट की ब्रेक दी जाती है। मैच के दौरान अधिक गोल दागने वाली टीम विजेता होती है। ड्रा होने पर 5-5 मिनट का एकस्ट्रा टाइम दिया जाता है। फिर भी नतीजा न आए तो 5-5 स्ट्रोक दिए जाते हैं।
यहां हैं स्केटिंग रिंग-
शहर के सेक्टर 10 में स्केटिंग रिंक बना हुआ है। केबीडीएवी स्कूल सेक्टर-7 में रिंक रेस और रोलर हॉकी का बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर है। इसके साथ ही शहर के कई स्कूलों में रिंग बने हुए हैं। पंचकूला के कई स्कूलों में रोलिंग टाइगर्स की स्केटिंग एकेडमी खुली हुई है।
इतनी है स्केटिंग सीखने की फीस
सेक्टर 10 स्थित रिंक में स्टूडेंट 200 रुपये और नॉन स्टूडेंट 400 रुपये का पूरे साल का कार्ड बनवाकर स्केटिंग कर सकते हैं। वहीं अन्य जगहों पर स्केटिंग रिंक में 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये की फीस है।
टिप्स -
स्केटिंग कोच चंदर ने बताया कि एक बेहतरीन स्केटर बनने के लिए खिलाड़ी के शरीर में लचीलापन होना चाहिए। इसके साथ ही शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होना भी चाहिए।