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नौकरी के लिए मुंबई में भटक रही हॉकी की शान

Wed, 13 Aug 2014 04:15 PM IST
योगेंद्र सिंह/ अमर उजाला, हरिद्वार
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हॉकी की शान और मान में चार चांद लगाने वाली रोशनाबाद निवासी भारतीय राष्ट्रीय हॉकी टीम की खिलाड़ी वंदना कटारिया उत्तराखंड सरकार की उपेक्षा से बेहद दुखी हैं।
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हाल यह है कि ग्लास्गो से लौटने पर मंगलवार को हरिद्वार पहुंची इस इंटरनेशनल खिलाड़ी के स्वागत के लिए शासन और प्रशासन का कोई नुमाइंदा तक खड़ा नहीं हुआ।

पूर्व मुख्यमंत्री, हरिद्वार सांसद रहे एवं वर्तमान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नौकरी देने का इनसे वादा भी किया था। लेकिन अभी तक वादे हवाई रहे।

गोल्ड मेडल जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया

रोशनाबाद निवासी वंदना हॉकी में अब तक देश को अंतरराष्टीय मैचों में तीन गोल्ड, तीन सिल्वर और चार ब्रोंज मेडल दिलवा चुकी हैं।

नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में भी दो गोल्ड मेडल जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। सप्ताह भर पहले ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय टीम ने कनाडा, टोबैगो और स्कॉटलैंड से जीत हासिल। देश को पांचवें स्थान पर संतोष करना पड़ा।

टीम के ग्लास्गो से लौटने पर हरियाणा सरकार ने अपने खिलाड़ियों को पांच-पांच लाख रुपए नगद पुरस्कार दिया। मणिपुर सरकार ने भी अपने खिलाड़ियों को तीन-तीन लाख रुपए नगद दिए।

लेकिन भारतीय टीम की फर्स्ट इलेवन में शामिल मिड फील्ड खिलाड़ी वंदना कटारिया को प्रदेश सरकार ने कोई सम्मान नहीं दिया। ग्लासगो से लौटने के बाद भी खबर नहीं ली। वंदना के कोच कृष्ण कुमार ने बताया कि वंदना के साथ यह अन्याय है।

नौकरी के वादे का क्या हुआ सरकार

वंदना ने अमर उजाला को बताया कि जब वह जर्मनी से जीतकर आई थी तो तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने प्रदेश पुलिस में नौकरी देने का वादा किया था।

हरिद्वार से सांसद रहे हरीश रावत ने भी गांव में जाकर प्रदेश में नौकरी दिलवाने की बात परिजनों से कही थी। लेकिन किसी ने वादा नहीं निभाया। वंदना ने कहा कि वह अपने प्रदेश में नौकरी चाहती हैं।

ताकि वह अपने परिवार की मदद कर सके। वह इस समय मुंबई में रेलवे में टीसी के पद पर कार्यरत हैं।

घरवालों ने किया स्वागत
वंदना पांच अगस्त को ग्लासगो से मुंबई पहुंची। 12 अगस्त दोपहर एक बजे हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर परिवार के लोग बिटिया को लेने पहुंचे।

घर जाकर मां सोरण देवी, पिता नाहर सिंह के साथ भाई, भाभी, बहनों, भतीजे और भतीजियों ने वंदना का स्वागत किया। मां ने बेटी की आरती उतारी और मुंह मीठा कराया।
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अब तक की उपलब्धियां

वंदना पहली बार वर्ष 2007 में इटली में आयोजित हाकी प्रतियोगिता में खेलने गई थी और रजत पदक जीता।

2008 में मलेशिया में आयोजित एशिया कप में कांस्य पदक और वर्ष 2009 में रूस में फर्स्ट चैंपियंस चैलेंज प्रतियोगिता में स्वर्ण झटकने में कामयाबी पाई।

2009 में सिडनी में हुई आस्ट्रेलियन यूथ ओलंपिक फेस्टीवल में कांस्य पदक देश की झोली में डाला।
2012 में थाईलैंड (बैंकाक) में आयोजित एशिया कप में रजत और वर्ष 2013 में दिल्ली में वर्ल्ड लीग में स्वर्ण मिला।

जर्मनी में आयोजित वर्ल्ड कप 2013 में कांस्य पर कब्जा किया। इसी साल मलेशिया में एशिया कप में कांस्य और जापान में एशियन चैलेंज ट्राफी में रजत हासिल किया।

2014 में मलेशिया में आयोजित सिक्स्थ मैच टैस्ट सीरीज में स्वर्ण प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की।
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