सरदार की सेना के लिए इम्तिहान की घड़ी आखिर आ ही गई। भारत का यह इम्तिहान शनिवार को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ यहां चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी के सेमीफाइनल में होगा। भारत इसे पास कर फाइनल में स्थान बनाकर इतिहास लिख सकता है।
भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी में अब तक केवल एक कांसा 1982 में सुरिंदर सिंह सोढी की कप्तानी में जीता था। सरदार की सरदारी में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जीत हासिल कर ली तो वह उससे एक कदम आगे कम से कम रजत पदक तो पक्का कर लेगा। भारत किले की मजबूत चौकसी करने के साथ पाकिस्तान के जवाबी हमलों को नाकाम कर ‘स्ट्रक्चर’ हॉकी खेल कर अपनी इस हसरत को पूरी कर सकता है।
यह आसान भले न हो लेकिन नामुमकिन कतई नहीं है। भारत के समर्थक उसकी हौसलाअफजाई में यहां कलिंगा स्टेडियम में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी जोश के साथ होश रखना। भारत ने नीदरलैंड और बेल्जियम पर जीत से अपनी लय पा ली है।
यह हकीकत है कि सरदार रंग में होते हैं तो भारतीय टीम पूरी लय में खेलती है। भारत के हौसले इंचियान एशियाड के फाइनल में पाकिस्तान को हरा कर सुनहरा तमगा जीतने से बुलंद हैं। ऐसे में मोहम्मद इमरान की अगुवाई वाली पाकिस्तान के पलटवार से भारत को चौकस रहना होगा।
पाकिस्तान की ताकत हॉकी की कलाकारी के साथ उसके तेज जवाबी हमले हैं। भारत के पास पाकिस्तान से पिछली चैंपियंस ट्रॉफी में तीसरे स्थान के मैच में मिली 2-3 की हार का हिसाब चुकाने का सुनहरा मौका है। आंकड़ों के आइने में भले ही पाकिस्तान का पलड़ा भारत के मुकाबले भारी रहा है लेकिन हाल में भारत का रिकॉर्ड पाकिस्तान के मुकाबले बेहतर रहा है।