डोपिंग के डंक से खिलाड़ियों को बचाने के लिए भारतीय वेटलिफ्टिंग फेडरेशन कड़ा रुख अपनाने जा रही है। इस साल से खिलाड़ियों को डोपिंग की पूरी जानकारी कैंप के जरिए ही बता दी जाएगी।
इंडियन वेटलिफ्टिंग फेडरेशन के एग्जीक्यूटिव मेंबर केडीएस नागरा ने बताया कि अब स्टेट लेवल पर कंपीटीशन में हिस्सा लेने वाले सभी खिलाड़ियों का डोपिंग टेस्ट करवाया जाएगा।
इसमें हिस्सा लेने वाले सभी राज्यों की टीमों को एक महीने पहले अवगत करवा दिया जाएगा। इसके बावजूद अगर इस टेस्ट में कोई खिलाड़ी प्रतिबंधित दवाओं के सेवन में पकड़ा गया तो उस पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। वह आजीवन होगा या कुछ साल का इस पर फैसला बाद में लिया जाएगा।
वेटलिफ्टिंग कोच केडीएस नागरा ने बताया कि मेडल के चक्कर में कई खिलाड़ी गलत चीजों का इस्तेमाल कर लेते हैं। इसका असर दूसरे खिलाड़ियों पर पड़ता है। इन सबसे बचने के लिए समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है।
कैंप 12 मई से शुरू होगा। इसमें खिलाड़ियों को प्रतिबंधित चीजों की सभी जानकारियां दी जाएंगी, जिससे कि वह उनसे दूर रहे।
अधिक मुकाबले कराएं जाएं
नागरा के अनुसार वेटलिफ्टिंग में अभी और मेडल आ सकते हैं। बस इसके लिए अधिक से अधिक प्रतियोगिताएं होनी चाहिए, जिससे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार हो सकें।
महिलाओं में बढ़ा क्रेज
पुरुषों के मुकाबले वेटलिफ्टिंग में अब युवतियां भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। सेक्टर-42 स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में कई महिला खिलाड़ी रोजाना अभ्यास करते देखी जा सकतीं हैं। इनमें खालसा कॉलेज-26 में बीए द्वितीय वर्ष की मनप्रीत पिछले तीन वर्ष से वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हैं।
वह पंजाब यूनिवर्सिटी इंटर कालेज में गोल्ड मेडल विजेता हैं। वहीं एमसीए कर रही अर्शदीप तीन साल से लगातार इंटर कालेज गोल्ड मेडल विनर हैं। इन दोनों खिलाड़ियों के अनुसार पहले इसे लड़कों का खेल कहा जाता था, लेकिन अब लड़कियां इसमें अधिक से अधिक भाग ले रही हैं।