अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के ढांचे में हाल ही में हुए बदलाव से बीसीसीआई को जबर्दस्त फायदा होने वाला है। और अगले आठ साल (2015-2023) में बोर्ड को करीब 60 करोड़ डॉलर (37 अरब, 18 करोड़ रुपए से ज्यादा) की कमाई होगी।
बीसीसीआई सचिव संजय पटेल ने यह दावा एक न्यूज चैनल ने बातचीत के दौरान की। पटेल ने एक स्थानीय समाचार चैनल से कहा, "मेरे अनुमान से 2015 से 2023 के बीच आठ साल में बीसीसीआई को करीब 60 करोड़ डॉलर मिलेंगे।"
पटेल इस समय भुवनेश्वर में बीसीसीआई कार्यसमिति की बैठक में भाग लेने गए हुए हैं। आईसीसी के राजस्व में बीसीसीआई के हिस्से में बढ़ोतरी के बारे में उन्होंने कहा कि पिछले कई साल से बीसीसीआई का आईसीसी की कमाई में बड़ा योगदान रहा है।
नए नियमों ने दिलाया भारतीय बोर्ड को फायदा
उन्होंने कहा कि बीसीसीआई राजस्व का 68 प्रतिशत दे रहा है और बदले में उसे सिर्फ चार प्रतिशत मिलता है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि चार प्रतिशत की बजाय बीसीसीआई को अब 21 प्रतिशत मिलेगा।
2015 से 2023 के बीच बीसीसीआई का अनुमानित सकल राजस्व करीब 2.75 से तीन अरब डॉलर होगा। मौजूदा प्रावधान के तहत आईसीसी की कमाई का 75 प्रतिशत दस पूर्णकालिक देशों में बराबर बांटा जाता है और बाकी एसोसिएट सदस्यों को जाता है।
बीसीसीआई ने लिया एक और बड़ा फैसला
आईसीसी अंपायरों की इलीट पैनल में प्रतिनिधित्व पाने को बेताब बीसीसीआई देश में अंपायरों का स्तर सुधारने के लिए राष्ट्रीय अकादमी बनाएगा।
यह फैसला बीसीसीआई कोषाध्यक्ष रवि सावंत की अध्यक्षता वाली बोर्ड की अंपायरों की उपसमिति ने लिया। सावंत ने बैठक के बाद कहा, "देश में राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी बनाई जाएगी। क्षेत्रीय स्तर पर भी अकादमियां होंगी क्योंकि भारत में अंपायरिंग का स्तर बेहतर करने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा कि अंपायरों को प्रशिक्षित करने की मौजूदा सुविधाओं का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। उन्होंने मैच रैफरियों के प्रशिक्षण की पर्याप्त सुविधाओं के अभाव पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "अंपायरों के प्रशिक्षण की सुविधाएं तो हैं लेकिन मैच रैफरियों के लिए नहीं। इस अकादमी की जरिये अंपायरों और मैच रैफरियों में बेहतर तालमेल होगा।" श्रीनिवास वेंकटराघवन के 2004 में रिटायर होने के बाद से आईसीसी इलीट पैनल में भारत का कोई अंपायर नहीं है।