मासूम से चेहरे वाली कनिका कनवाल बैडमिंटन कोर्ट के बाहर जितना शांत रहती हैं, वहीं कोर्ट के अंदर पहुंचते ही उनका खेल उनकी पहचान बन जाता है।
अंडर-17 गर्ल्स में चौथी रैंक
देश में अंडर-17 बालिका सिंगल में चौथी रैंक पर काबिज दिल्ली को खिलाब दिलाने वाली की कनिका मूल रूप से उत्तराखंड की ही रहने वाली हैं। टूर्नामेंट में कनिका का शानदार प्रदर्शन को देख एयर इंडिया ने अपने साथ जोड़ा है और स्कॉलरशिप दी है।
ऑल इंडिया जूनियर रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट में अंडर-17 बालिका एकल वर्ग में कनिका कनवाल ने एकल का खिताब अपने नाम किया।
उत्तराखंड की है मूल निवासी
गोपीचंद बैडमिंटन एकेडमी में खेल की बारीकियां सीख रही दिल्ली की यह खिलाड़ी मूल रूप से अल्मोड़ा के खत्याड़ी की रहने वाली है। दिल्ली के कनाट प्लेस में पली बढ़ी कनिका टूर्नामेंट से पहले ही अपने गांव होकर आई थीं।
कनिका ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बताया कि उनके खेल की प्रेरणा उनके पिता नरेंद्र सिंह हैं, जो एएसएन सीनियर सेकेंडरी स्कूल दिल्ली में कोचिंग देते हैं।
जीत चुकी हैं तीस खिताब
जब वे कक्षा तीन में थी, तब शौकिया तौर पर खेल देखने जाती थी और यहीं से उनको भी खेलने का मन किया। 2006 में खेल की शुरुआत करने के बाद इसी साल अंडर-10 का स्टेट चैंपियनशिप जीती, तो हौसला बढ़ा।
2010 में अंडर-13 और 2013 में अंडर-15 का नेशनल टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया। करीब 30 नेशनल व रैंकिंग खिताब जीत चुकी कनिका ने इंडोनेशिया में हुई एशियन चैंपियनशिप में अंडर-15 के क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था।
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