ऑस्ट्रेलिया की पुरुष टीम भले ही अभी तक एक बार भी ट्वंटी-20 वर्ल्ड कप नहीं जीत सकी हो लेकिन उसकी महिला टीम ने दिखा दिया कि क्रिकेट के इस सबसे छोटे प्रारूप में उसका कोई सानी नहीं है।
रविवार को दो बार की गत चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने गेंदबाजों के बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत इंग्लैंड को छह विकेट से हराकर महिला ट्वंटी-20 वर्ल्ड कप में अपनी बादशाहत कायम रखते हुए लगातार तीसरी बार यह खिताब जीता।
पिछले वर्ल्ड कप (2012) में भी ऑस्ट्रेलियाई टीम इंग्लैंड को ही हराकर चैंपियन बनीं थी।
लो स्कोरिंग मैच को आसानी से जीता
टॉस जीतकर ऑस्ट्रेलिया ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया और इंग्लैंड टीम को 20 ओवर में आठ विकेट पर सिर्फ 105 रन के मामूली स्कोर पर रोक दिया।
टीम के लिए हीथर नाइट ने 24 गेंदों में तीन चौकों के साथ सर्वाधिक 29 रन की पारी खेली। वहीं, लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने 15.1 ओवर में चार विकेट पर 106 रन बनाकर आसानी से जीत हासिल कर ली।
मैग लेनिंग ने 30 गेंदों में चार चौकों और दो छक्कों के साथ 44 रन की तेज पारी खेली। एलिस पैरी 32 गेंदों में तीन चौकों और एक छक्के के साथ 31 रन बनाकर नाबाद रही।
टूर्नामेंट में एक भी छक्का नहीं लगा सकी यह टीम
दिलचस्प बात यह है कि फाइनल तक का सफर तय करने वाली इंग्लैंड टीम ने इस पूरे टूर्नामेंट में एक भी छक्का नहीं जड़ा जबकि ऑस्ट्रेलियाई टीम ने कुल 14 छक्के जड़े।
ऑस्ट्रेलिया की ओर से सारा कोएट ने चार ओवर में 16 रन देकर तीन विकेट चटकाए और ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बनी।
इंग्लैंड की मीडियम पेसर आन्या शुरुबसोले ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ बनीं। 22 साल की श्रबसोल ने कहा कि फाइनल में पहुंचना बहुत बड़ी उपलब्धि रही। उन्होंने कहा, "मुझे इस बात की गहरी निराशा है कि हम खिताब नहीं जीत पाए लेकिन फाइनल में पहुंचना भी हमारे लिए बड़ी उपलब्धि रही।"श्रबसोल ने 5.75 के औसत से 12 विकेट लिए।