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चंडीगढ़ से हॉकी सीखी और पाक को धूल चटाई

Fri, 03 Oct 2014 09:17 AM IST
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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16 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत ने आखिरी एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत लिया। इस जीत में अहम भूमिका निभाने वाले धर्मवीर सिंह और रूपिंदरपाल ने चंडीगढ़ से ही हॉकी सीखी है।
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भारत ने पाकिस्तान को इस मैच में पेनेल्टी शूटआउट में 4-2 से हराया। इन चार गोल में एक-एक गोल इन दोनों खिलाड़ियों ने ही किया। धर्मवीर और रूपिंदरपाल सेक्टर-42 स्थित हॉकी अकादमी के ट्रेनी रहे हैं।

सुबह ही फोन पर कहा था-जरूर जीतेंगे

धर्मवीर ने वीरवार सुबह ही अपने चचेरे भाई को फोन पर कहा था कि आज मैं जरूर खेलूंगा और पाकिस्तान को हरा कर रहेंगे। चचेरे भाई सुखबीर के अनुसार पिछले मैच में धर्मवीर की मसल्स खिंच गई थीं, इसलिए मैच खेलने को लेकर हमें आशंका थी।

धर्मवीर के भाई कुलविंदर ने बताया कि आज हमारे लिए जश्न का दिन है। रोपड़ में ढोली बुला लिया गया है। मां लाभ कौर का कहना था कि मेरे बेटे ने पूरे देश का नाम रोशन किया है। धर्मवीर सिंह का परिवार रोपड़ के पास गांव खैहराबाद का रहने वाला है। पिता खेती बाड़ी का काम करते हैं।

रूपिंदर ने वादा निभाया

एशियन गेम्स के लिए रवाना होने से पहले रूपिंदरपाल सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा था कि अगर फाइनल मुकाबला पाकिस्तान से हुआ तो बहुत रोचक होगा। हम जज्बातों पर काबू पाते हुए जीतने के लिए पूरा दम लगा देंगे।

रूपिंदर ने पहले ही मुकाबले में श्रीलंका के खिलाफ हैट्रिक लगाकर अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। रूपिंदरपाल फरीदकोट के रहने वाले हैं और पिता वहां फर्नीचर का काम करते हैं।
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सीनियर्स ने दी बधाई

इस जीत का लुत्फ उठाएं, रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने पर मेरी तरफ से सभी खिलाड़ियों को बधाई।’
- बलबीर सिंह सीनियर, पूर्व ओलंपियन और 1975 की विश्वकप विजेता टीम के कोच

काफी समय से इस गोल्ड की प्रतीक्षा थी, एशियाड में यह सपना पूरा हुआ है।
- सतेंद्र शर्मा, अंतरराष्ट्रीय हॉकी एंपायर

मुझे इस जीत की बहुत खुशी हैं, फिर भी टीम ने अभी लंबा सफर तय करना है। यह तो अभी शुरुआत हैं।
- राजिंदर सिंह सीनियर, पूर्व भारतीय कोच
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