ये सभी जानते हैं कि टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के सबसे प्रिय फिरकी गेंदबाज आर अश्विन हैं और वह अपने लगातार खराब प्रदर्शन के बाद भी टीम में बने हुए हैं।
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अश्विन के बाद प्रज्ञान ओझा या रवींद्र जडेजा का नंबर आता है। जडेजा तो आलराउंडर की भूमिका में सफल हो गए हैं। जहां तक अमित मिश्रा का सवाल है वह बेहतरीन लेग स्पिनर हैं लेकिन धोनी इस गेंदबाज को शायद बहुत पसंद नहीं करते।
लेकिन टी-20 वर्ल्ड कप में अपनी टीम और प्रिय गेंदबाज अश्विन की नाकामी के बाद धोनी को अमित मिश्रा को मौका देना ही पड़ा जिसे उन्होंने सौ फीसदी सही साबित कर दिया।
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विराट कोहली की कप्तानी में हुई थी वापसी
लेग स्पिनर अमित मिश्रा ने 13 अप्रैल 2003 को ढाका में ही अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज किया था। लेकिन पिछले साल जिंबाब्वे दौरे से पहले धोनी ने उन्हें ज्यादा मौके नहीं दिए और वह 10 साल से ज्यादा के अंतरराष्ट्रीय करियर में महज 15 वनडे मैच ही खेल सके थे।
पिछले साल जिंबाब्वे दौरे पर गई टीम इंडिया की अगुवाई विराट कोहली ने की थी और उन्होंने इस गेंदबाज को मौका दिया जिसे उन्होंने सही साबित किया। साथ ही एक सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने के वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली।
इसके बाद भी धोनी ने इस गेंदबाज को अपनी टीम में शामिल करना गवारा नहीं समझा। वह टीम में कभी भी नियमित सदस्य के रूप में नहीं रहे। हालांकि लंबे समय तक टीम के साथ ड्रेसिंग रूम में बैठने के बाद उन्हें टी-20 वर्ल्ड कप में मौका मिला।
पाक के खिलाफ जीत के नायक रहे थे मिश्रा
टी-20 वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले माना जा रहा था कि बांग्लादेश में फिरकी गेंदबाजों का जलवा रहेगा। इसीलिए कप्तान धोनी ने टूर्नामेंट में अपने पहले ही मैच में पाकिस्तान के खिलाफ अमित मिश्रा को शामिल भी कर लिया।
भारत का इस साल क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन नहीं रहा था और वह न्यूजीलैंड दौरे में एक भी जीत हासिल नहीं कर सका था। ऐसे में सबसे बड़ा संकट यही था कि पाकिस्तान के खिलाफ अपने पहले मैच में भारत कितना शानदार प्रदर्शन कर पाएगा।
लेकिन टीम इंडिया ने अमित मिश्रा की फिरकी गेंदबाजी की अगुवाई में पाक बल्लेबाजों पर अंकुश बनाए रखा। अमित ने इस मैच में बेहद कसी हुई गेंदबाजी की और चार ओवर में महज 22 रन दिए। उन्होंने एक मेडन के साथ-साथ 2 विकेट भी निकाले। यह अमित की कसी हुई गेंदबाजी का कमाल था कि पाक 20 ओवर में 130 रन ही बना पाया। भारत ने यह लक्ष्य आसानी से हासिल भी कर लिया। शानदार गेंदबाजी के लिए अमित को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना गया।
वर्ल्ड चैंपियन टीम के बल्लेबाजों को भी छकाया
कप्तान धोनी कभी भी अमित मिश्रा को टीम एकादश में शामिल करने के हिमायती नहीं रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें वर्ल्ड चैंपियन वेस्ट इंडीज के खिलाफ मुकाबले में भी अमित को शामिल करना पड़ा।
इस मैच में भी अमित ने गजब की गेंदबाजी की और विपक्षी टीम के बल्लेबाजों को खुलकर रन बनाने का मौका नहीं दिया। उन्होंने चार ओवर में महज 18 रन ही दिए और दो विकेट भी झटक लिए। इस बार भी उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया।
यह अमित मिश्रा की शानदार प्रदर्शन का ही परिणाम है कि भारत इस साल पहली बार लगातार दो मैच जीतने में कामयाब रहा है। अब वह अपने ग्रुप में पहले पायदान पर पहुंच गया है।
पिछले दो मैचों में धोनी-अमित की जुगलबंदी
महेंद्र सिंह धोनी के खामसखास क्रिकेटरों में सूची से अमित मिश्रा भले ही बहुत दूर हों लेकिन इन दो मैचों में 6 जो दिलचस्प आंकड़े बने हैं उसे आप जानेंगे तो दंग रह जाएंगे।
पाकिस्तान और वेस्ट इंडीज के खिलाफ मैचों में टॉस भारत ने ही जीता और दोनों ही बार पहले गेंदबाजी लिया।
अमित मिश्रा की गेंद पर दोनों ही मैचों में धोनी ने एक-एक बल्लेबाज को स्टंप आउट कराया। साथ ही अमित ने दोनों मैचों में 2-2 विकेट झटके और मैन ऑफ द मैच बने। इसके अलावा टीम इंडिया के लिए विजयी रन सुरेश रैना के बल्ले से निकला। छठा दिलचस्प आंकड़ा है कि दोनों ही मैच भारत ने 7 विकेट से जीते।
सनी ने अमित की तारीफ में नहीं की कंजूसी
अपने करियर में मात्र तीन टी-20 मैचों में दो बार ‘मैन ऑफ द मैच’ अपने नाम करने वाले लेग स्पिनर अमित मिश्रा की मौजूदगी को पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं।
टी-20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान और वेस्टइंडीज के खिलाफ दोनों मैचों में गेंदबाजों ने अहम भूमिका निभाई जिसमें अमित मिश्रा लगातार दोनों मैचों में ‘मैन ऑफ द मैच’ रहे।
पूर्व कप्तान गावस्कर ने कहा कि बेहद कमजोर समझी जाने वाली टीम इंडिया की गेंदबाजी मिश्रा की मौजूदगी से एकाएक बेहद मजबूत हो गई है। उन्होंने कहा, "टीम की गेंदबाजी में सबसे बड़ा अंतर मिश्रा ने डाला है। उन्होंने टीम के गेंदबाजी आक्रमण में नए रंग भरे हैं। वह बेहतरीन लेग स्पिनर हैं जो गेंद को बेहतरीन ढंग से कम पेस के साथ स्पिन करा रहे हैं जो टीम में और कोई नहीं करा पाता है।"
सुनील गावस्कर ने अमित मिश्रा की गेंदबाजी शैली की जमकर तारीफ की।
उन्होंने कहा, "उनकी गेंदबाजी 70 के दशक से भी पहले के ढंग की तरह है जो काफी धीमी होती थी और मैच में बहुत बड़ा फर्क पैदा करती थी। भारतीय गेंदबाजों ने इन पिचों का बखूबी फायदा उठाया है। यदि आपको टर्निंग पिच मिलती है तो आपको विविधता लाने की जरूरत नहीं होती। आप सिर्फ सही लाइन और लेंथ पर गेंद करें और आपको विकेट मिल जाती है।"
दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड में खराब प्रदर्शन के बाद भारतीय गेंदबाजी सवालों के घेरे में थी और भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने भी टूर्नामेंट शुरू होने से पहले गेंदबाजी को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि पिछले मैचों में टीम इंडिया के गेंदबाजों ने पाक को 130 और वेस्टइंडीज को मात्र 129 के स्कोर पर रोक कर साबित कर दिया है कि गेंदबाजी ही टीम की मजबूत कड़ी बन गई है।