14 साल और 4 विदेशी कोच। इस दौरान टीम इंडिया टॉप पर भी पहुंची तो पूरी तरह फेल भी हुई। कोई कोच भारतीय क्रिकेट के लिए मसीहा साबित हुआ तो कोई पूरी तरह से फेल भी रहा। किसी ने विदेशों में जीतना सिखाया तो कोई अपने कार्यकाल में पूरी तरह विवादों में ही घिरा रहा।
टीम इंडिया की विदेशी धरती पर मिली लगातार चौथी टेस्ट सीरीज में हार के बाद एक बार फिर बाहर के कोचों को लेकर बहस शुरू हो गई है। 62 साल की उम्र में जब डंकन फ्लेचर को टीम इंडिया का कोच चुना गया था तो उनसे काफी आस थी लेकिन उनके काल में टीम को विदेशी धरती पर एक भी जीत नसीब नहीं हुई। फ्लेचर का कार्यकाल अब खत्म होने जा रहा है तथा अब एक और विदेशी कोच को लाने की तैयारी चल रही है।
आइए, जानते हैं विदेशी कोच और उनकी कोचिंग में भारतीय क्रिकेट की सफलता और असफलता की कहानी।
जॉन राइट ने सिखाया विदेशों में जीतना
सन 2000 में टीम इंडिया को पहला विदेशी कोच मिला। इस किवी कोच ने अपने आप को लो प्रोफाइल रखते हुए पर्दे के पीछे से काम किया। खुद कभी पिक्चर में नहीं आए।
पूर्व बल्लेबाज राइट पांच साल टीम इंडिया के कोच रहे और उन्होंने सिखाया कि विदेशी सरजमीं पर कैसे जीत दर्ज की जाती है। इनके कोच रहते भारतीय टीम ने विदेशी धरती पर 10 टेस्ट जीते। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीम को भी उनके ही मैदानों पर शिकस्त दी। विश्व कप के फाइनल तक पहुंचाया।
विवादों में घिरे रहे कंगारू कोच ग्रेग चैपल
जॉन राइट की सफलता के बाद यही उम्मीद थी कि ऑस्ट्रेलिया का यह महान बल्लेबाज भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
कोच बनते ही ग्रेग चैपल विवादों में घिर गए। उनकी 'मैं ही बॉस हूं' की मानसिकता भारतीय क्रिकेटरों को रास नहीं आई। सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली से उनका विवाद किसी से छिपा नहीं है। इसका असर टीम इंडिया के प्रदर्शन पर भी नजर आया।
टीम इंडिया विदेशी धरती पर 12 में से सिर्फ 4 टेस्ट मैच की जीत सकी। साथ ही उनके काल में राहुल द्रविड़ की अगुवाई वाली टीम इंडिया में 2007 के वर्ल्ड कप के पहले राउंड में बाहर हो गई।
गैरी कर्स्टन ने बनाया टेस्ट की नंबर वन टीम
ग्रेग चैपल के विवादास्पद दौर के बाद टीम इंडिया को साथ मिला दक्षिण अफ्रीका के गैरी कर्स्टन का।
दिग्गज बल्लेबाज रहे कर्स्टन भारत के तीसरे विदेशी कोच बने। वह सिर्फ तीन साल कोच रहे लेकिन उन्होंने भारतीय क्रिकेट को बुलंदियों पर पहुंचाया। इनके कार्यकाल में टीम इंडिया न केवल टेस्ट की नंबर वन टीम बनी बल्कि 28 साल बाद वर्ल्ड चैंपियन बनने में भी सफल रही।
इस दौरान भारत ने विदेश में 14 टेस्ट खेले जिसमें से छह मैच में वह जीत दर्ज करने में सफल रही।
पूरी तरह फेल रहे डंकन फ्लेचर
जिम्बाब्वे में जन्मे डंकन फ्लेचर को जब टीम इंडिया का कोच बनाया गया था तब उन्होंने साठ से ज्यादा बसंत देख लिए थे। उनके चयन पर लोगों ने सवाल भी उठाए कि यह बुजुर्ग कोच टीम इंडिया के लिए कितने उपयोगी साबित होंगे। तब कहा गया था कि उनका अनुभव टीम के लिए फायदेमंद साबित होगा।
इंग्लैंड के पूर्व कोच रहे फ्लेचर जब टीम इंडिया के कोच बने उस समय भारतीय क्रिकेट ट्रांजिशन के दौर से गुजर रहा था। राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी एक-एक कर विदा ले रहे थे। ऐसे में उन पर जिम्मेदारी थी कि वे भारत के युवा क्रिकेटरों को परखते हुए नए सिरे से टीम को खड़ा करें। लेकिन हुआ उल्टा।
टीम इंडिया विदेशी जमीं पर पूरी तरह से फेल हुई। 14 में 10 टेस्ट हारी और 4 मुकाबले ड्रॉ रहे। साफ है कि फ्लेचर पूरी तरह से फेल रहे हैं। फ्लेचर के काल में टीम इंडिया ने वनडे में अपना वर्ल्ड नंबर वन का ताज भी गवां दिया।
अब एंडी फ्लॉवर की है चर्चा
डंकन फ्लेचर के पूरी तरह से फेल होने के बाद अब एक और विदेशी कोच की चर्चा होने लगी है। ये हैं एंडी फ्लॉवर।
जिम्बाब्वे के धाकड़ बल्लेबाज रहे एंडी फ्लॉवर ने हाल ही तक इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कोच पद से इस्तीफा दिया था। इंग्लैंड की ऑस्ट्रेलिया में मिली शर्मनाक हार के बाद उन्होंने अपना पद छोड़ा।
ऐसे कयास हैं कि एंडी भारत के अगले कोच बन सकते हैं। लेकिन भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सचिव संजय पाटिल ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि अभी इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है। अब सवाल यह उठता है कि क्या किसी विदेशी को ही कोच बनाना जरूरी है। भारत में ऐसा कोई नहीं जो टीम इंडिया की कोचिंग का जिम्मा संभाल सके।