जोहानिसबर्ग में शानदार प्रदर्शन के बाद टीम इंडिया से डरबन टेस्ट में भी वही खेल की आस थी लेकिन धोनी के धुरंधर अपनी लय बरकरार नहीं रख सके और टीम को हार का सामना करना पड़ा। सचिन तेंदुलकर के संन्यास लेने के बाद टीम इंडिया का यह पहला दक्षिण अफ्रीका दौरा था।
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युवा खिलाड़ियों से लबरेज टीम इंडिया के पास अफ्रीकी दौरे को ऐतिहासिक बनाने का बेहतरीन मौका था लेकिन धोनी की टीम ने कुछ ऐसी गलतियां की जिससे भारत इतिहास नहीं लिख सका। भारत अब तक एक भी सीरीज दक्षिण अफ्रीका में नहीं जीत सका है और अगर आज का मैच ड्रॉ हो जाता तो पहली बार सीरीज बचाकर टीम इंडिया स्वदेश लौटती।
आइए जानते हैं कि डरबन टेस्ट में मिली 10 विकेट से करारी हार के पीछे वो छह अहम कारण कौन से रहे।
दूसरे दिन भारतीय बल्लेबाजी लड़खड़ाई
जोहानिसबर्ग टेस्ट के बाद डरबन में भारतीय टीम को बल्लेबाजों ने बेजोड़ शुरुआत दी थी। पहले दिन का खेल खत्म होने के समय भारत का स्कोर एक विकेट पर 181 रन था। मुरली विजय (91) और चेतेश्वर पुजारा (58) क्रीज पर थे।
लेकिन बारिश से बाधित खेल के दूसरे दिन की शुरुआत लंच के बाद हुई तो भारत ने अभी महज 17 रन ही जोड़े थे कि पुजारा 70 रन बनाकर आउट हो गए। उसके बाद मुरली विजय भी शतक से तीन रन से चूक गए।
इसके बाद विकेटों के गिरने का जो सिलसिला शुरू हुआ वो थमा ही नहीं और भारत ने अपने नौ विकेट महज 134 रनों के अंदर गंवा दिए। बल्लेबाज डेल स्टेन की तूफानी गेंदबाजी का डटकर सामना नहीं कर सके और एक के बाद एक करके विकेट गंवाते चले गए। स्टेन ने इस पारी में छह विकेट झटके जबकि तीन विकेट मोर्ने मोर्कल को मिले।
तीसरे दिन फ्लॉप रहे भारत के तेज गेंदबाज
भारत के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों जो शुरुआत दी थी उसे मध्य क्रम बरकरार नहीं रख सका। यही हाल भारत की तेज गेंदबाजी आक्रमण का भी रहा। जहीर खान की अगुवाई में तेज गेंदबाजी बल्लेबाजों पर रोक पाने में नाकाम रही।
दक्षिण अफ्रीका को पहले विकेट के लिए 103 रनों की शतकीय साझेदारी मिली। फिरकी गेंदबाज रवींद्र जडेजा ने तीसरे दिन इस साझेदारी को तोड़ा। लेकिन तेज गेंदबाज अफ्रीकी बल्लेबाजों के रन बनाने पर अंकुश नहीं लगा सके। तेज गेंदबाजी इस कदर फ्लॉप रही कि मेजबान टीम के पहले छह में से पांच विकेट जडेजा ने झटके।
लचर गेंदबाजी का आमल यह था कि दक्षिण अफ्रीका की ओर से जैक्स कैलिस (115) के शतक के अलावा तीन बल्लेबाजों ने अर्धशतक लगाए। जबकि तीन बल्लेबाजों ने 40 से ज्यादा का स्कोर किया। इशांत शर्मा जहां एक भी विकेट ले नहीं सके वहीं मोहम्मद शमी को सिर्फ एक विकेट से संतोष करना पड़ा। जबकि अनुभव जहीर खान दूसरे टेस्ट में केवल दो विकेट ही चटकाने में सफल रहे।
धोनी ने गेंद बदलने में बहुत देरी कर दी
भारतीय गेंदबाज खेल के तीसरे दिन जब अफ्रीकी बल्लेबाजों से पीट रहे थे तो इसके पीछे कप्तान धोनी का एक अजीबोगरीब फैसला भी कारण साबित हुआ।
कप्तान धोनी ने पुरानी हो चुकी गेंद को बदलने में काफी देरी की। गेंद न बदलने के पीछे उनकी योजना बल्लेबाजों को आक्रामक बल्लेबाजी करने से रोकने की रही हो लेकिन इससे गेंदबाज विकेट हासिल करने के लक्ष्य से दूर होते चले गए। पुरानी गेंद से ही अपने तेज गेंदबाजों को खिलाया, जिससे गेंदबाज थके नजर आए।
गेंद पुरानी होने की वजह से गेंद की रफ्तार धीमी थी और विपक्षी बल्लेबाज सहज तरीके से खेलते दिखे तथा बिना किसी चुनौती के मेजबान बल्लेबाजो ने रन बटोरे। धोनी ने 145 ओवर के बाद पुरानी हो चुकी गेंद को बदला। गेंद जब बदली गई तो उसकी दशा देखने लायक थी।
बल्लेबाजों ने खेले खराब शॉट और खोया विकेट
डरबन टेस्ट के पहले चार दिन में जो हुआ सो हुआ। भारत को मैच बचाने के लिए अंतिम दिन टिककर खेलना था लेकिन भारतीय बल्लेबाजों से यह भी नहीं हो सका।
भारत ने मैच के पांचवें दिन दो विकेट से 68 रन से आगे खेलना शुरू किया लेकिन पहली ही गेंद पर विराट कोहली आउट हो गए। टीम इंडिया की नई दीवार चेतेश्वर पुजारा भी अपना विकेट बचाकर नहीं रखा पाए। शीर्ष क्रम की नाकामी के बाद मध्य क्रम के बल्लेबाजों के खराब शॉट ने भारत का खेल और बिगाड़ दिया।
कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और आलराउंडर रवींद्र जडेजा खराब शॉट खेलकर अपना विकेट गंवा दिया। अफ्रीकी धरती पर नाकाम रहे रोहित शर्मा भी सस्ते में आउट हो गए। पहली पारी में 29 रन बनाने वाले शिखर धवन ने भी खराब शॉट खेलकर अपना विकेट खोया। हालांकि प्लेसिस ने शानदार प्रयास कर उनका कैच लपका था लेकिन जिस समय उन्होंने यह शॉट खेला उस समय उसकी कोई जरूरत नहीं थी।
पुछल्ले जैसा नहीं दिखा जुझारूपन
टीम इंडिया की दूसरी पारी में पुछल्ले बल्लेबाजों ने जो जुझारूपन दिखाया वो शीर्ष और मध्य क्रम में नहीं दिखा। भारत ने चार विकेट 36.1 ओवर में गंवा दिए थे।
इसके बाद भारत का मध्य क्रम भी जुझारूपन नहीं दिखा पाया और 25.5 ओवर के अंदर चार और विकेट खो दिया।
जबकि पुछल्लों ने अंजिक्य रहाणे के साथ अफ्रीका की तेज गेंदबाजी का डटकर सामना करते हुए 24 ओवर खेल लिए।
खराब अंपायरिंग भी भारत की हार के सबब बने। मैच का अंतिम दिन बेहद निर्णायक साबित हुआ।
दिन की पहली ही गेंद पर विराट कोहली अंपायर के गलत फैसले का शिकार बन गए। पिछले मैच के मैन ऑफ द मैच रहे कोहली का दूसरी पारी में अंपायरों द्वारा गलत दिया जाना भी इस मैच का टर्निंग प्वाइंट रहा। कोहली की बांह में गेंद लगी थी जबकि उन्हें कैच आउट करार दिया गया।
अंपायरों का गलत फैसला यहीं पर खत्म नहीं हुआ। अंजिक्य रहाणे के साथ महत्वपूर्ण 16 ओवर निकालने वाले पुछल्ले बल्लेबाज जहीर खान भी गलत फैसले के शिकार बने। उन्हें लेग स्टंप पर बाहर जाती हुई गेंद पर आउट कर दिया गया।