वर्ल्ड चैंपियन टीम इंडिया पांच मैचों की सीरीज में न्यूजीलैंड से 0-3 से पीछे है और सीरीज में वापसी की उम्मीद भी खत्म हो गई है। सीरीज के लिहाज से देखा जाए तो वेलिंगटन में होने वाले पांचवें वनडे मैच का कुछ खास महत्व नहीं रह गया है।
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लेकिन महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम इंडिया के सामने इस मैच में जीत हासिल कर कुछ लाज बचाने का मौका है। भारत ने पिछले चार मैचों में जिस तरह का प्रदर्शन किया है उससे टीम की छवि काफी धुमिल हुई है।
भारत से रैंकिंग के मामले में न्यूजीलैंड काफी ऊपर है, लेकिन कीवी टीम ने जिस तरह से भारतीय टीम को अपने प्रदर्शन से उन्नीस साबित किया है उससे खिलाड़ियों का मनोबल जरूर गिरा होगा। अगले महीने खेले जाने वाले टेस्ट सीरीज से पहले इस मैच में मिली जीत भारतीय टीम के लिए उत्साहवर्धन का काम कर सकती है।
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2104 में है पहली जीत का इंतजार
भारत जब इस दौरे के लिए रवाना हुआ, तब वह वनडे रैंकिंग में नंबर वन की पोजिशन पर था। लेकिन उसने वह ताज भी गंवा दिया। विदेशी धरती पर भारत को पिछले सात मैचों से एक भी जीत नहीं मिली है। इन सात मैचों में भारत को पांच मैचों में हार मिली है। एक मैच बारिश से पूरा नहीं खेला जा सका, जबकि एक मैच टाई हो गया था।
पिछले साल टीम इंडिया ने लगातार छह सीरीज जीतने का कारनामा किया था, लेकिन दिसंबर में दक्षिण अफ्रीका दौरे पर गई भारतीय टीम को वनडे सीरीज में 0-2 से हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद भारत ने न्यूजीलैंड में भी वनडे सीरीज गंवाई है।
साल 2014 का पहला महीना अब गुजरने जा रहा है लेकिन भारत को साल की पहली जीत का इंतजार अभी भी है।
'टीम को घबराने की जरूरत नहीं'
सीरीज में लगातार दो अर्धशतकीय पारी खेलने वाले टीम इंडिया के आलराउंडर रवींद्र जडेजा ने मैच से पूर्व अपने साथियों का बचाव करते हुए कहा कि फिलहाल टीम को घबराने की जरूरत नहीं है।
जडेजा ने टीम को सलाह देते हूए कहा, "हमें मैच से पहले घबराने की जरूरत नहीं है। जब हम सोचना छोड़ देंगे तभी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।"
विराट कोहली के पिछले दो मैच को छोड़ दिया जाए तो वह शुरुआती दो मैचों में बेहद सफल रहे थे। उनके अलावा कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और रवींद्र जडेजा भी शानदार फॉर्म में हैं। धोनी ने सीरीज में लगातार तीसरी अर्धशतकीय पारी खेली है जबकि जडेजा ने लगातार दो अर्धशतक लगाए हैं।
हालांकि अन्य बल्लेबाज शिखर धवन, अजिंक्य रहाणे और सुरेश रैना जैसे बल्लेबाज अब तक इस देश में अपनी बल्लेबाजी की लय पकड़ नहीं पाए हैं। जबकि अंबाती रायुडू ने अपने पहले मैच में उपयोगी योगदान दिया था अगर उन्हें अंतिम मैच में भी मौका मिलता है तो उनसे इस बार बड़ी पारी खेलने की आस होगी।
शमी के साथ-साथ अन्य गेंदबाजों से भी आस
तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को छोड़ दिया जाए तो भुवनेश्वर कुमार का प्रदर्शन सीरीज में उतार-चढ़ाव वाला रहा है। जबकि रविचंद्रन अश्विन, स्टुअर्ट बिन्नी और तेज गेंदबाज इशांत शर्मा ने पिछले लगभग सभी मैचों में टीम को निराश किया है।
गेंदबाजों के लचर प्रदर्शन से निराश कप्तान धोनी ने भी गेंदबाजों को समझदारी से खेलने की सलाह दी है। चौथे वनडे में भारत को हराने के बाद न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान और बल्लेबाज रॉस टेलर ने भी कहा था कि उनकी टीम की रणनीति भारतीय स्पिनरों को विकेट निकालने से रोकना थी। न्यूजीलैंड भारतीय खिलाड़ियों की कमजोरियों से अवगत हो चुकी है और उसी के हिसाब से खेल रही है।
बल्लेबाजी में लय पा चुके आलराउंडर रवींद्र जडेजा को गेंदबाजी में कुछ कमाल करना होगा। न्यूजीलैंड के मार्टिन गुप्टिल, केन विलियम्सन, रॉस टेलर और कप्तान ब्रैंडन मैकुलम सभी बेहतरीन बल्लेबाज हैं और एक बार फिर भारतीय गेंदबाजों पर जमकर प्रहार करने की तैयारी में हैं जिन्हें रोकना अब भारतीय गेंदबाजों की जिम्मेदारी होगी। विलियम्सन तो सीरीज के सभी चारों मैचों में अर्धशतक ठोक चुके हैं।
अक्टूबर, 2012 में वनडे मुकाबले में लागू की गई फील्डिंग की नई व्यवस्था टीम इंडिया के गेंदबाजों को रास नहीं आ रही है। जब से यह नियम लागू हुआ है तब से भारतीय गेंदबाजों की जमकर धुनाई हो रही है।
नए नियम लागू होने के बाद से भारत 11 मैचों में 300 या 300 से ज्यादा का रन दिए हैं। इस मामले में ऑस्ट्रेलिया दूसरे स्थान पर है जिसने भारत से पांच बार कम इतने रन दिए हैं।
ऑस्ट्रेलिया इस दौरान 10 मैचों में 300 या 300 से ज्यादा रन बनाए हैं, जबकि भारत ने आठ बार ऐसा किया है।