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शिवलिंग की पूजा करने जा रहे हैं, इस बात का ध्यान रखें

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महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग में चारों पहर भगवान शिव का वास माना जाता है। जिस प्रकार आप दिन के हर प्रहर में भोजन में अलग-अलग चीजें खाना पसंद करते हैं।
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ठीक उसी प्रकार भोलेनाथ की पूजा के भी नियम है। अलग-अलग प्रहर में पूजा के लिए अलग-अलग चीजों का प्रयोग करना चाहिए।
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प्रथम प्रहर में शिव की पूजा

अगर आप सूर्योदय से तीन घंटे के अंदर भगवान शिव की पूजा करने जा रहे हैं तो तिल, जौ, कमल एवं बेल पत्र से भगवान शिव की पूजा करें।

दूसरे प्रहर में इन चीजों से करें शिव की पूजा

सूर्योदय के तीन घंटे के बाद अगर आप पूजा करने जा रहे हैं तो बिजौरे का फल, नींबू एवं खीर के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा करें। भगवान भोले नाथ को भांग और धतूरा भी चढ़ा सकते हैं।

लेकिन ध्यान रखें सूर्योदय के छह घंटे के अंदर इन चीजों से शिव जी की पूजा करें।

तीसरे प्रहर में शिव जी की पूजा

सूर्योदय के छह घंटे के बाद से नौ घंटे के अंदर आप पूजा करने जा रहे हैं तो तिल, मालपुआ, अनार एवं कपूर से शिव जी की पूजा करें।

चौथे प्रहर में शिव की पूजा

सूर्योदय के नौ घंटे के बाद अगर आप पूजा करने जा रहे हैं तो उड़द, जौ, मूंग, बेलपत्र, शंखपुष्पी से भोलनाथ की पूजा करें।
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शिव पूजा का सामान्य तरीका

अगर आपके लिए प्रहर के अनुसार समग्री जुटाना कठिन हो तो कोई बात नहीं।

भगवान शिव को गंगाजल से स्नान करवाकर में बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करें और 108 बार शिव पंचाक्षरी मंत्र नमः शिवाय का जप करें।

इससे ही भोलेनाथ प्रसन्न हो जाएंगे। बस आपकी भक्ति सच्ची होनी चाहिए।
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