इस साल होली 17 मार्च सोमवार को है। परंपरा के अनुसार होली के एक दिन पहले यानी फाल्गुन पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में भद्रारहित समय में होलिका दहन किया जाता है।
दिल्ली में होलिका दहन का शुभ समय
इस नियम के अनुसार इस वर्ष भद्र सुबह के 10 बजकर 2 मिनट पर समाप्त हो रहा है। इसके बाद से समय होलिका दहन के लिए अनुकूल है।
लेकिन शुभ समय की बात करें तो दिल्ली में होलिका दहन का शुभ समय 16 मार्च को शाम 6 बजकर 26 मिनट से 7 बजकर 38 मिनट तक है।
आपके शहर में होलिका दहन का शुभ समय
मुंबई में 4 बजकर 45 मिनट से 7 बजकर 57 मिनट तक, कोलकाता में 5 बजकर 42 मिनट से 6 बजकर 54 मिनट तक समय शुभ रहेगा। बेंगलुरु में 5 बजकर 27 मिनट से 7बजकर 39 मिनट का समय होलिका दहन के लिए शुभ रहेगा।
पटना में 5 बजकर 54 मिनट से 7बजकर 6 मिनट से 7 बजकर 6 मिनट तक बढ़िया समय है। जबकि चंडीगढ़ में 6बजकर 28 मिनट से 7 बजकर 40 मिनट के बीच होलिका दहन करना लाभप्रद है।
इस तरह होलिका जलाने से लाभ मिलता है
होलिका पूजा करते समय, पूजा करने वाले व्यक्ति को होलिका के पास जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
होलिका दहन के समय फल-फूल, जल, मौली, गुलाल तथा गुड़ आदि से होलिका का पूजन करना चाहिए। गोबर से बनाई गई ढाल और खिलौनों की चार मालाएं भी होलिका पूजन में इस्तेमाल किए जाते हैं।
इसमें से एक माला पितरों के नाम की, दूसरी हनुमान जी के नाम की, तीसरी शीतला माता के नाम की तथा चौथी अपने घर-परिवार के नाम की होती है।
कच्चे सूत को होलिका के चारों और 3-7 परिक्रमा करते हुए लपेटा जाता है। फिर शुद्ध जल और अन्य पूजन की सभी वस्तुओं को एक-एक करके होलिका को समर्पित किया जाता है।
होलिका दहन होने के बाद होलिका में जिन वस्तुओं की आहुति दी जाती है, उसमें कच्चे आम, नारियल, भुट्टे या सप्त धान्य, नई फसल का कुछ भाग है।
इसी तरह अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिए नवग्रहों की लकड़ी मंत्रोच्चारण कर होलिका में अर्पण करने का विधान है।
होलिका दहन के दौरान गेहूं की बाली को इसमें सेंकना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन के समय बाली सेंककर घर में फैलाने से धन-धान्य में वृद्धि होती है।