सीबीआई के पूर्व अधिकारी नीरज कुमार के अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के समर्पण से संबंधित कथित दावे के बाद अब एक नया विवाद सामने है। केंद्र सरकार ने कल लोकसभा में दिए गए एक जवाब में भारत के मोस्ट वांटेड आतंकवादी दाऊद के बारे में यह कहकर सबको चौंका दिया कि उसे मुंबई बम कांड के इस भगोड़े आतंकवादी के ठिकाने के बारे में कुछ नहीं पता!
1993 में मुंबई में हुए शृंखलाबद्ध धमाकों के बाद से देश की पुलिस और खुफिया एजेंसियां दाऊद इब्राहिम की तलाश कर रही हैं। इन दो दशकों में देश में करीब आधा दर्जन सरकारें बन चुकी हैं और तकरीबन सभी प्रमुख दल सत्ता में रह चुके हैं, इसके बावजूद दाऊद को नहीं पकड़ा जा सका है। मगर एक बात पर तकरीबन सभी सरकारों में सहमति रही है कि दाऊद को पाकिस्तान ने पनाह दे रखी है, और वह न केवल वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संरक्षण में मौज काट रहा है, बल्कि अंडरवर्ल्ड की गतिविधियों को भी वहां से अंजाम दे रहा है।
पिछले दो दशकों से तमाम भारतीय सरकारें पाकिस्तान पर उसे सौंपने के लिए दबाव भी बनाती रही हैं। मई, 2011 में जिन पचास आतंकियों के खिलाफ भारत ने दस्तावेज सौंपे थे, उनमें माफिया सरगना दाऊद का नाम भी शामिल था। यहां तक कि पिछले वर्ष दिसंबर में जब अपने गुर्गे से बात करते दाऊद का एक टेप एक विदेशी एजेंसी ने जारी किया था, तब मौजूदा मोदी सरकार के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि हम पाकिस्तान से दाऊद को सौंपने की मांग कर रहे हैं। उस वक्त उनके एक कनिष्ठ मंत्री किरण रिजिजू ने कहा था कि इस बात के सुबूत हैं कि दाऊद पाकिस्तान में है।
मगर एक अन्य गृह राज्य मंत्री हरिभाई चौधरी के ताजा बयान से सरकार की फजीहत हो गई है। उन्होंने कहा है कि एक बार दाऊद का ठिकाना पता चल जाने के बाद उसके खिलाफ प्रत्यर्पण की कार्रवाई की जाएगी। इससे एनडीए सरकार का सत्ता में आने के बाद दाऊद को भारत लाकर उसके खिलाफ मुकदमा चलाने का दावा कमजोर हुआ है। इससे तो पाकिस्तान को और बहाना मिल जाएगा, जो पहले से ही दाऊद के अपने यहां होने से इन्कार करता आया है। होना तो यह चाहिए कि पाकिस्तान पर प्रत्यर्पण संधि करने के लिए दबाव बनाया जाए ताकि दाऊद को भारत लाया जा सके।