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उनका गुनाह क्या है?

Fri, 12 Jul 2013 10:16 PM IST
नई दिल्ली
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समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के गढ़ इटावा के एक गांव में एक युवती के साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार और फिर उसे जिंदा जला दिए जाने की घटना के बारे में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता, क्योंकि पीड़ित पक्ष और पुलिस के बयानों में काफी अंतर है। मगर यह घटना बताती है कि महिलाओं के उत्पीड़न और बलात्कार के मामले में मृत्युदंड और उम्रकैद की सजा जैसे कड़े प्रावधान वाले कानून के अस्तित्व में आने के बावजूद महिलाओं की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।
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दरअसल, पुरुषवर्चस्ववादी मानसिकता भी महिलाओं के उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार है। जैसा कि बताया जा रहा है, आरोपी युवकों में से एक के साथ उस युवती के प्रेम संबंध थे और दोनों के विवाह की बात भी चल रही थी, मगर प्रेम करना क्या कोई गुनाह है? हैरत की बात है कि इतनी शर्मनाक घटना पर सत्तारूढ़ सपा के एक वरिष्ठ नेता ने क्षुब्ध कर देने वाली प्रतिक्रिया दी है कि इतने बड़े देश में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं।

बेशक, महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित अनेक मामलों में पारिवारिक या नजदीकी लोगों की संलिप्तता पाई जाती है या फिर आरोपी और पीड़िता पहले से परिचित होते हैं, जैसा कि इस मामले में भी संभव हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस अपनी जिम्मेदारी से तो नहीं बच सकती? और फिर यह अकेली घटना नहीं है, दो दिन पहले प्रतापगढ़ में भी बलात्कार पीड़ित एक युवती की जीभ आरोपी के भाई ने काट ली, ताकि वह अदालत में बयान न दे सके।
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पिछले महीने ही लखीमपुर में एक महिला की तेजाबी हमले में मौत हो गई थी। उससे पहले शामली में चार बहनों को राह चलते दो लोगों ने तेजाब फेंककर जख्मी कर दिया था। ये घटनाएं सूबे में महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ही बता रही हैं। अभी हाल ही में आरटीआई के जरिये हासिल की गई जानकारी में हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं कि 2008 से 2012 के दौरान उत्तर प्रदेश में बलात्कार के सर्वाधिक मामले जिन जिलों में दर्ज किए गए, उनमें राजधानी लखनऊ भी शामिल है।

जाहिर है, कड़े कानून के साथ यह भी जरूरी है कि उस पर अमल करने वाला तंत्र भी सख्त हो, तभी इस तरह के अपराधों पर अंकुश लग सकेगा। वाकई समाजवादी पार्टी को यह सोचना चाहिए कि उसके शासनकाल में कानून-व्यवस्था सवालों के घेरे में क्यों आ जाती है?
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