रूस के प्राचीन शहरों में से एक वोल्गोग्राद इन दिनों आतंकवादी धमाकों के चलते सुर्खियों में है। इस वजह से इस शहर से मात्र 650 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित सोची में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक-2014 को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। वोल्गा नदी के तट पर स्थित यह शहर अनेक ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है। इसकी स्थापना दो जुलाई, 1589 को एक किले के रूप में हुई थी।
565 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में पसरा यह शहर रूस का सबसे लंबा शहर है, जहां कई ऐतिहासिक स्मारक, सांस्कृतिक केंद्र एवं वास्तुकला के नमूने मौजूद हैं। अब तक के इतिहास में तीन बार इस शहर का नाम बदला गया है। मौजूदा नाम वोल्गाग्राद 1961 में रखा गया था।
यह शहर कई युद्धों का भी गवाह रहा है, जिसमें सबसे प्रसिद्ध द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान स्तालिनग्राद (उस समय शहर का यही नाम था) को लेकर हुआ युद्ध था। वह युद्ध 17 जुलाई, 1942 को शुरू हुआ था और दो फरवरी, 1943 को खत्म हुआ। वह युद्ध काफी भीषण था, जिसमें करीब दस लाख बम इस शहर पर गिराए गए थे। यह शहर पूरी तरह से तबाह हो गया था और 20 लाख से ज्यादा सोवियत एवं जर्मन सैनिक मारे गए थे। नाजी जर्मनी के खिलाफ संघर्ष में वह युद्ध एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ था।
उस युद्ध की स्मृति में फरवरी, 2013 से हर वर्ष छह दिनों के लिए इस शहर का नाम स्तालिनग्राद रखने का फैसला लिया गया है। यहां रूस के कई महत्वपूर्ण औद्योगिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक केंद्र भी हैं। करीब दस लाख आबादी वाले इस शहर में एक हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन और यूरोप का सबसे बड़ा नदी बंदरगाह है। यह एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में भी मशहूर है।