आम आदमी पार्टी ने राजधानी के खिड़की एक्सटेंशन इलाके में हुई छापेमारी की घटना के सिलसिले में कानून मंत्री सोमनाथ भारती को क्लीन चिट दे दी है, जिसका साफ मतलब है कि वह उन पर कोई कार्रवाई करने नहीं जा रही है। पार्टी ने अपने तई यह मान लिया है कि भारती ने उस दिन न तो किसी प्रक्रिया का उल्लंघन किया था, न ही कोई नस्लीय टिप्पणी की थी और न ही किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार किया।
मगर एक नए तरह की राजनीति के साथ मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी यह नहीं समझ रही है कि व्यवस्था को बदलने का यह मतलब नहीं है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विभिन्न संस्थाओं को मिले अधिकारों को ध्वस्त कर दिया जाए! अरविंद केजरीवाल की व्यक्तिगत छवि ईमानदार व्यक्ति की है, उनकी नीयत पर भी सवाल नहीं उठाए जा सकते। यही बात उनके अनेक साथियों पर भी लागू होती है। लेकिन वह खुद भी जानते हैं कि उनके बहुत से साथी, मंत्री और विधायक राजनीतिक रूप से अपरिपक्व ही नहीं, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और व्यवस्था से भी अनभिज्ञ हैं, जिसकी वजह से पार्टी को कहीं अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
सोमनाथ भारती के ही मामले में जो तथ्य आए हैं, वे पार्टी की ओर से दिए गए तर्कों से मेल नहीं खाते। यदि उनकी तरह देश के सारे मंत्री इसी तरह छापेमारी पर निकल पड़ें, तो अंदाजा लगाना मुश्किल होगा कि कैसी अफरा-तफरी मच जाएगी। इसी तरह पार्टी के एक अन्य नेता कुमार विश्वास की कुछ पुरानी क्लिपिंग भी पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन रही हैं और बागी विधायक बिन्नी यदि पार्टी से अलग हो गए, तो सरकार की हालत क्या हो जाएगी!
आप को यह भी समझना होगा कि कांग्रेस राजनीति करने में माहिर है और देर-सबेर वह अपने समर्थन की कीमत भी वसूल सकती है। महज एक वर्ष पहले अस्तित्व में आई पार्टी को इतनी जल्दी ऐसी कामयाबी इसलिए मिली, क्योंकि उसने कांग्रेस की वंशवादी और भाजपा की संकीर्ण राजनीति के साथ ही जातिवादी तथा क्षेत्रवादी राजनीति करने वाली पार्टियों से इतर एक नए तरह की समावेशी राजनीति का वायदा किया है।
लेकिन यदि वह अपनी जिद पर इसी तरह अड़ी रही, तो उसकी चमक खोते देर नहीं लगेगी। आप लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरने का ऐलान भी कर चुकी है, इसलिए उसके लिए यह और भी जरूरी हो जाता है कि वह कोई ऐसा कदम न उठाए, जो आत्मघाती साबित हो।