डिपो में कर्मचारी भी, बसों के टैंक भी डीजल से लबालब, लेकिन एक भी बस नहीं चली। कर्मचारियों के साथ परिवहन अधिकारी भी करनाल के फैसले के इंतजार में बैठे रहे।
चक्का जाम के दूसरे दिन रोहतक डिपो से एक भी बस नहीं चली। आमजन बस स्टैंड तक पहुंचता और मायूस होकर विकल्प की तलाश में लौट जाता। बेपरवाह जिला प्रशासन दिनभर मौन रहकर हाथ पर हाथ रखे बैठा रहा और जनता परेशान। दो दिन में रोहतक डिपो को 20 लाख से अधिक का नुकसान हुआ है।
प्रशासन विकल्प मुहैया कराने में पूरी तरह नाकाम है। बता दें कि हड़ताल कैथल में कर्मचारियों से मारपीट के विरोध और 3519 निजी परमिट रद्द करने की मांग को लेकर है।
इन्होंने किया संबोधित
कर्मचारी यूनियन दूसरे दिन भी अड़े रहे। सर्व कर्मचारी संघ के महासचिव सुभाष लांबा, कर्मचारी महासंघ के महासचिव वीरेंद्र धनखड़, अध्यापक नेता मास्टर वजीर सिंह, जिला रोहतक के सर्व कर्मचारी संघ प्रधान रमेश लोरा, कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान जोगेंद्र बलहारा, सर्व कर्मचारी संघ के जिला सचिव सुमेर सिवाच, कर्मचारी महासंघ जिला सचिव विरेंद्र गुलिया, रमेश गहलावत, आनंद खिड़वाली, कृष्ण सुहाग, सुभाष मोखरा, जयभगवान कादियान, किसान नेता व भूतपूर्व रोडवेज प्रधान जयप्रकाश बैनिवाल, सर्व कर्मचारी संघ के कार्यालय सचिव महावीर मलिक, जितेंद्र लाकड़ा, महताब, दलजीत सिंह, मंजीत जसराणा, सुरेंद्र मलिक, सतवीर मुंढाल, कर्मवीर राठी, राजवीर मकड़ौली, राजवीर, धर्मवीर, जगदीश, युद्धवीर दांगी ने कर्मियों को संबोधित किया। स्टेज संचालन सचिव जयकंवार दहिया और जयदीप लाठर ने किया।
छात्र नेता आए समर्थन में
एसएफआई नेता विनोद देसवाल, राज्य सचिव संदीप व सोनू ने कहा कि प्रदेश की छात्राएं कालेज, स्कूल व संस्थानों में शिक्षा ग्रहण करने के लिए शहर व कस्बों में जाती हैं। उन्हें हरियाणा राज्य परिवहन की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जा रही है। इसके उल्ट हरियाणा सरकार प्राइवेट परमिट देकर राज्य परिवहन के बेड़े को नष्ट करना चाहती है।
दूसरे विभागों के कर्मी नेता भी पहुंचे
हरियाणा कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कंवर सिंह यादव ने स्थानीय बस स्टैंड पर पहुंच चक्का जाम को समर्थन दिया। कहा, हरियाणा रोडवेज ने 17 बार राष्ट्रीय स्तर पर पहला पुरस्कार हासिल किया है। पंजाब से अलग होने के बाद प्रदेश में रोडवेज की 250 के लगभग टूटी-फूटी गाड़ियां थीं। आज परिवहन बेड़ा 3850 पर पहुंच गया। 44 श्रेणियों को मुफ्त या रियायती दर पर परिवहन सेवा देने वाले विभाग का सरकार बंटाधार करना चाहती है।