हर आतंकवादी संगठन मानवता का दुश्मन होता है, पर आईएस ने थोड़े ही समय में नृशंसता के जो नमूने पेश किए हैं, वे स्तब्ध कर देने वाले हैं। लोगों के गला रेतने का वीडियो बनाकर उसने दुनिया भर में सनसनी फैलाने की जो शुरुआत की, वही बहुत आपत्तिजनक थी। अब उसने जॉर्डन के एक पायलट को जिंदा जलाने का जो वीडियो जारी किया है, वह तो क्रूरता की तमाम हदों को पार कर देने वाला है।
एक सभ्य समाज न सिर्फ क्रूरता के सार्वजनिक प्रदर्शन की इजाजत नहीं देता, बल्कि ऐसी अमानवीय कार्रवाइयों को अंजाम देने वालों को दंडित भी करता है। पर आईएस जहां ऐसी कार्रवाइयों को लगातार अंजाम दे रहा है; इससे पहले उसने दो जापानी पत्रकारों की हत्या कर दी, वहीं उसके खिलाफ अमेरिकी नेतृत्व में बने मोर्चे की धार अब कुंद पड़ती दिख रही है। जॉर्डन के उस पायलट को कार्रवाई के दौरान आईएस ने बंदी बनाया था, ऐसे में उसकी रिहाई के लिए सभी देशों को एकजुट होना चाहिए था।
बेशक अमेरिका और ब्रिटेन ने भी आईएस के हाथों अपने नागरिक खोए हैं, इसके बावजूद यह सच्चाई तो है ही कि आईएस के खिलाफ अभियान में वैसी ताकत और अपने लड़ाकों की सुरक्षा की वैसी अचूक व्यवस्था दिख नहीं रही, जो होनी चाहिए। संयुक्त अरब अमीरात ने इस मोर्चे से खुद को अलग कर लिया है, तो उसकी वजह यही है। बेशक यह समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि आईएस के खिलाफ पूरी दुनिया का एकजुट होना ही समय की मांग है।
अमूमन सैन्य गतिविधियों से दूर रहने वाले जापान ने पश्चिम एशिया में आईएस की घेरेबंदी के लिए जो पहल की है, वह भी बताती है कि यह वस्तुतः पूरी मानवता को बचाने की लड़ाई है। आईएस का लगातार उभार भारत के लिए भी सजग होने का अवसर होना चाहिए। सिर्फ यही नहीं कि हमारा देश उसके निशाने पर है, और लड़ाई के मोर्चे से लेकर सोशल मीडिया तक इस संगठन से जुड़े कई भारतीय लड़ाकों की शिनाख्त हुई है, बल्कि उसके बहकावे में आने वाले युवाओं की संख्या अब भी काफी बताई जाती है।
जॉर्डन के पायलट की हत्या के बाद जहां यह विश्व समुदाय के लिए आईएस के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने का अवसर है, वहीं अपने यहां इस आतंकी संगठन के कुटिल इरादों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाकर हम भी इस जंग में बड़ा योगदान दे सकते हैं।