‘कुचले हुए फूल फिर से मुस्करा सकते हैं बस कोई उन्हें सीने से लगाने वाला चाहिए’
यह सोच है जिला कारागार के अधीक्षक डॉ. हरीश कुमार रंगा की है। डॉ. रंगा ने अपनी इसी सोच की बदौलत जिला कारागार को प्रशिक्षण केंद्र में तब्दील कर दिया है। डॉ. रंगा द्वारा जिला कारागार में मल्टी आर्ट कल्चर विंग स्थापित की गई है। इस विंग में सैकड़ों कैदी तथा बंदी अपनी रुचि के अनुसार पेंटिंग, संगीत, हस्त शिल्प, कंप्यूटर का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
\वहीं जिला कारागार में बंद महिला कैदियों तथा बंदियों को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए हस्त शिल्प का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कैदियों तथा बंदियों को शारीरिक तथा मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ध्यान तथा राज योग केंद्र भी स्थापित किया गया है, जिसमें योग तथा ध्यान के प्रशिक्षकाें द्वारा कैदियों तथा बंदियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके अलावा जिला कारागार में समय-समय पर खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है।
रंग लाई एक साल की मेहनत
जिला कारागार में स्थित जिस भवन में इस समय मल्टी आर्ट कल्चर विंग चल रही है, उस भवन में एक वर्ष पहले तक गेहूं का गोदाम था। यह भवन बुररी तरह से जर्जर था। जनवरी 2013 में डॉ. हरीश कुमार रंगा द्वारा जिला कारागार का कार्यभार संभाले जाने के बाद इस जर्जर भवन पर लाखों रुपये खर्च कर इसका कायाकल्प कर यहां मल्टी आर्ट कल्चर विंग स्थापित की गई।
डॉ. रंगा के प्रयासों के बाद आज जिला कारागार पूरी तरह से प्रशिक्षण केंद्र का रूप धारण कर चुका है। यहां सैकड़ों कैदी तथा बंदी प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने में लगे हैं।
मल्टी आर्ट कल्चर विंग में यह-यह हैं सुविधाएं
जेल परिसर में स्थापित मल्टी आर्ट कल्चर विंग में संगीत में रुचि रखने वाले कैदियों तथा बंदियों को संगीत की विधा सिखाई जाती है। यहां संगीत में पीएचडी डॉ. राजेंद्र कुमार निशुल्क सेवाएं दे रहे हैं। इसी प्रकार मन की शांति के लिए कैदियों तथा बंदियों को आध्यात्म की ओर आकर्षित करने के लिए ध्यान कक्ष बनाया गया है। मल्टी आर्ट कल्चर विंग में कैदियों तथा बंदियों को योग क्रियाएं भी कराई जा रही हैं।
यहां समय-समय पर विभिन्न धर्म प्रचारकों को आमंत्रित कर प्रेरक व्याख्यान दिलवाए जाते हैं। वहीं इसी सेंटर में कैदियों तथा बंदियों की पढ़ाई के लिए क्लास रूम, कंप्यूटर रूम तथा पुस्तकालय स्थापित किया गया है। जेल परिसर में रोजगारोन्मुखी व्यवसायों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि जेल से बाहर निकलने परकैदी तथा बंदी अपना स्वयं का व्यवसाय चलाकर समाज में सम्मानजनक तरीके से जीवन व्यतीत कर सकें।
महिलाओं को भी दिया जा रहा है स्वरोजगार का प्रशिक्षण
महिलाओं को टेडी बियर और अन्य हस्त निर्मित खिलौने बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिला विंग परिसर में एक मंदिर का निर्माण भी कराया जा रहा है। इस परिसर में भी मल्टी कल्चर आर्ट विंग स्थापित की गई है, जहां महिलाओं को संगीत, आध्यात्म, स्वरोजगार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
महिलाओं के साथ रह रहे बच्चों के लिए पढ़ाई तथा खाने-पीने के लिए फल-फ्रूट की भी विशेष व्यवस्था की गई है। जेल परिसर के अंदर दीवारों पर महान पुरुषों के चित्र बनाए गए हैं। उनके नीचे सुविचार लिखे गए हैं।
कई बार इंसान से जाने-अनजाने में गलतियां हो जाती हैं। इसलिए उन्हें एक बार सुधरने का अवसर अवश्य मिलना चाहिए। जिला कारागार में बंद कैदी तथा बंदी हमारे समाज का ही हिस्सा हैं।
इसलिए हमें इन्हें एक अच्छा नागरिक बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। इसी उद्देश्य को लेकर जिला कारागार में मल्टी आर्ट कल्चर विंग स्थापित की गई है। ताकि कैदी तथा बंद यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर यहां से निकलने के बाद सम्मानजनक जीवन व्यतित कर सकें।
डॉ. हरीश कुमार रंगा, जिला कारागार अधीक्षक, जींद